ये पूरा मुल्क अब वाइल्ड है, बहुत से मैन हैं, पूरा मुल्क मैन वर्सेज वाइल्ड है

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ये पूरा मुल्क वाइल्ड है और हम सब मैन हैं। (हालात, परिस्थितियों को देखते हुए वुमेन भी मैन ही गिन लीजिए) हर रात, दिन दोपहर, शाम, यहां तक की आधी रात, भोर सब मैन वर्सेज वाइल्ड है। पर याद करिए तो आपको अब से कुछ दिन पहले तक मैन वर्सेज वाइल्ड के नाम पर सिर्फ डिस्कवरी चैनल और बेयर ग्रिल्स याद आते थे और अब (ट्रेलर रिलीज होने के बाद) बेयर ग्रिल्स और डिस्कवरी वाले बाद में और नरेंद्र मोदी पहले याद आ रहें हैं।

मसला नरेंद्र मोदी और बेयर ग्रिल्स के उत्तराखंड में जिम कार्बेट पार्क में ऐन पुलवामा हमले के वक्त ही शूटिंग में व्यस्त होना भर नहीं है। ये मसला उन 130 करोड़ के करीब पहुंच रहे हिंदुस्तानियों की रोजमर्रा की जिंदगी में वाइल्डनेस या जंगली के बढ़ते जाने से भी जुड़ा है।

man vs wild

ये मुल्क टुकड़ों में नहीं बल्कि पूरी तैयारी और भीड़ के साथ जंगलीपन को ओढ़ता जा रहा है। कितने किस्से याद कीजिएगा। मत करिए। किस्से याद करेंगे तो दुख होगा, डर भी लगेगा। न जाने किस राह में, किस मोड़ पर किसी को जंगलीपन की हद तक मारती भीड़ मिल जाए। वही भीड़ जो आपकी आत्मा तक को आपके शरीर से खुरच खुरच कर निकाल लेने की कोशिश करती रहती है। वही भीड़ जो संविधान को जय जय के नारे के बीच अपने कदमों से तब तक रौंदती है जब तक वो दूर ऊंची जगह पर बनी गोल इमारत में बहुमत का सोमरस पीए लोगों को अठ्ठाहास की वजह न दे दे। सब कुछ जंगली है, वाइल्ड। हम सब मैन हैं।

मुल्क के पास बहुतेरी हनुमान चालिसा हैं। सड़कें हैं, मंदिर हैं। पर याद कीजिए तो इसी मुल्क में आपको बिन किताब के बच्चे भी मिल जाएंगे और टूटी छत के स्कूल भी याद आ जाएंगे। सब कुछ जंगली सा है। टपकती छतों के बीच लगती सरकारी स्कूलों की कक्षाएं और टाट पट्टी पर बैठते बच्चे मैन हैं। ये पूरा दृश्य ही मैन वर्सेज वाइल्ड है।

अस्पताल की देहरी पर प्रसव करती महिलाएं और सरकार की पोषण स्कीम के तहत मिलने वाला दलिया और राजमा। फिर याद करिए तो एंबुलेंस न मिलने से शव को ले जाने में आ रही दिक्कत से निपटने के लिए अपने ही परिजन के शव की हड्डियां तोड़ते लोग। सब कुछ ही तो वाइल्ड सा है। कहने को तो ये सब भी मैन ही हैं।

सुबह से शाम तक दौड़ती जिंदगी का हर हिस्सा वाइल्ड वर्सेज मैन हो जाता है। स्कूल के लिए निकला बच्चा, नौकरी की तलाश में निकला युवा, नौकरी करने के लिए निकला युवा और अधेड़ के बीच वाला, नौकरी बचाने के लिए जद्दोजहद में लगा अधेड़, आधार अपडेट कराने को लाइन में लगा बुजुर्ग, बैंक में एलपीजी सब्सिडी का पता लगाने को पासबुक अपडेट कराता शख्स। सब कुछ तेजी से जंगली होता जा रहा है।

गौर करिए तो मुल्क में दौर बेहद खुशनुमां है। जंगलीपन को जीने के लिए अब हर भारतीय आजाद है। मुल्क की फिजाओं में हर तरह जंगलीपन की खुशबू है। दिल्ली से चलती, उत्तराखंड के जिम कार्बेट में ठहरती। ये खुशबू उस इंसानी जले शरीर, इंसानी लहू की गंध पर भी भारी पड़ जाती है जो पुलवामा से उठती है। हम सब जंगली हो गए हैं, निरे निपट वाइल्ड। हम सब मैन हैं। ये पूरा मुल्क मैन वर्सेज वाइल्ड है। डिस्कवर हो गया।

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