त्रिवेंद्र का इस्तीफा रीजनल मीडिया के लिए एक सबक है, हम बीमार हो गए हैं…

  उत्तराखंड में हुआ सियासी घटनाक्रम भारत की रीजनल मीडिया के लिए एक सबक है। उत्तराखंड में रीजनल मीडिया खासी सशक्त है और अपना प्रभाव...

काशी रहस्य।। सुनो, मैं मणिकर्णिका हूं – भाग 3

  मणिकर्णिका का तिलिस्म और कालरात्रि सुनो, मैं मणिकर्णिका हूं। कल मैंने बिस्सू भैय्या और दैय्या गुरू का किस्सा सुनाया था। यकीन मानों उसके बाद पूरी...

काशी रहस्य।। सुनो, मैं मणिकर्णिका हूं – भाग 2

सुनो, मैं मणिकर्णिका हूं !!! रूप बदलती भैरवी और बाबा मसान नाथ के साधक... सुनो, मैं मणिकर्णिका हूं। उस दिन मैंने तुम्हें अपनी इस धरा के...

काशी रहस्य।। सुनो, मैं मणिकर्णिका हूं – भाग 1

सुनो, मैं मणिकर्णिका हूं !!! यहां हर सूरत में छिपी है कापालिक की भैरवी... सुनो, मैं मणिकर्णिका हूं। दिन रात जलती हूं। मेरी बांहों में हर वक्त...

कोरोना, कलाकार और सरकार

सत्यदेव त्रिपाठी।  कोरोना की बन्दी शुरू हुई, तब से ही हमारे कलाजगत से छिटफुट आवाजें आ रही थीं कि सरकार को कलाकारों की मदद...

गृह मंत्री जीवित हैं, मजदूर मर गए हैं। ट्वीट कर कौन बताएगा?

अच्छा लगा ये जानकर कि देश के गृह मंत्री स्वस्थ हैं, जीवित हैं। सुखी होंगे ये कामना है हमारी। पर गृह मंत्री जी, मजदूर...

‘जोकर’ : शोषण एवं उससे विद्रोह की प्रक्रिया का रूपक – सत्यदेव त्रिपाठी

फिल्म में आर्थर फ्लेक नामक ‘जोकर’ के रूप में नायक बने जौक़िन फोयनिक्स का अद्भुत अभिनय देखकर मैं 15-20 मिनटों में ही उसका दीवाना...

यूपी में नमक और रोटी के रास्ते रामराज्य आया है, बोलिए जय श्री राम

क्या खूब राम राज आया है। थाली में नमक है, हाथ में रोटी है और रामराज्य के तरानों के बीच मासूम मुल्क की भूख...

ये पूरा मुल्क अब वाइल्ड है, बहुत से मैन हैं, पूरा मुल्क मैन वर्सेज वाइल्ड है

ये पूरा मुल्क वाइल्ड है और हम सब मैन हैं। (हालात, परिस्थितियों को देखते हुए वुमेन भी मैन ही गिन लीजिए) हर रात, दिन...

दोपहर की तपती धूप और नंगे पांव दौड़ता वो शहर, कलकत्ता जेहन में यूं उतरता है

कमल किशोर जोशी। कोलकाता को आधुनिक भारत की सबसे पुरानी नगरी कहा जा सकता है. सड़कों पर आज भी बेखौफ दौड़ती पीले रंग की...

शब्द राग – अमृता प्रीतम की वो कविता ‘मैं फिर मिलूंगी’

अमृता प्रीतम की कविता 'मैं तुम्हे फिर मिलूंगी' को सुनना अच्छा लगता है। इस तरह देखना और सुनना भी सुकून देगा। आप चाहें तो...

हर लड़की में निहित अमृता को जगाना होगा….

सत्यदेव त्रिपाठी। रींवा जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित शहर के निवासी योगेश त्रिपाठी लिखित नाटक ‘मुझे अमृता चाहिए’ को मुम्बई के नये रंगसमूह ‘कारवाँ’ ने...

वो मां जो बच्चे को जिंदा रखने की खातिर उसे जी भर के सोने भी नहीं देती…

मैं और पूरा परिवार तो उस वक्‍त बेहद खुश था, जब यर्थाथ हमारी जिंदगी में आया. हमारी तो पूरी दुनिया ही उसके इर्द-गिर्द सिमट...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...