महाभारत काल में इंटरनेट था और दुर्योधन का जनधन खाता मोदी सरकार ने खुलवाया था

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वैधानिक चेतावनी – फालतू समय हो तभी पढ़िए।

राजनीति सिर्फ संभावनाओं का नहीं भयंकर संभावनाओं का क्षेत्र है। विडंबना ये कि जो पांचवीं पास न कर पाए वो शिक्षा विभाग की नीतियां बनाएं। और जो बीटेक एमटेक कर पाए वो नारद को गूगल बताए। दिलचस्प है ये राष्ट्रवाद।

दरअसल त्रिपुरा के सीएम विप्लव देव जब ये कहते हैं कि महाभारत काल में भी इंटरनेट था और संजय उसी का इस्तेमाल कर धृतराष्ट को युद्ध का हाल बताते थे तो जाहिर है कि कोई डिवाइस भी रही होगी जिसके जरिए वो सबकुछ देख रहे होंगे। हो सकता है कि वो शाओमी का मोबाइल रहा हो या फिर एप्पल का टैबलेट। लेकिन संजय चाइनीज आइटम्स का इस्तमाल कैसे कर सकते हैं? फिर तो कोई इंडियन या स्वदेशी टाइप का मोबाइल रहा होगा। कहीं वो फ्रीडम 299 तो नहीं था?

वही रहा होगा। पक्का।

फिर डाटा प्लान कौन सा रहा होगा? कोई भी रहा हो जियो की टक्कर का तो नहीं ही रहा होगा। जब डाटा प्लान की बात छेड़ी है तो रिचार्ज किस थर्ड पार्टी एप से करते होंगे। पक्का पेटीएम जैसा रहा होगा। पेट निकला हो तो भी पे-टी-एम करो।नेशनल जिंगल है भाई। जब पेटीएम था तो कैशबैक भी रहा होगा और बैंक अकाउंट भी रहा होगा। चिंदी चोरी जैसा कैशबैक रीडिम करने के लिए महाभारत काल में किस बैंक का अकाउंट यूज करते होंगे। 2018 के प्रखर राष्ट्रवादी काल में हमें यही मानना चाहिए कि वो जन धन खाता रहा होगा जो मोदी सरकार ने खुलवाया होगा। अगर आप ऐसा नहीं मानते तो आपको भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

viplav dev
pic courtsey – daily hunt/google

अब बैंक अकाउंट था तो जाहिर है कि एटीएम भी रहे होंगे। लेकिन उस वक्त एटीएम में कैश नहीं रहता होगा। सबकुछ कैशलेस रहा होगा। कार्ड स्वैप करिए और द्रोपदी की कीमत….

आगे के बारे में विप्लव बाबा को बयान देने तक रुकिए।

महाभारत काल में हर घर में बिजली थी, लोग चूल्हे पर खाना भी नहीं बनाते थे। उज्जवला योजना की सफलता की इससे बड़ी कहानी क्या हो सकती है। गांधारी आपको लाइटर जलाते हुए दिख जाएं।

और पता है…

ओह नहीं, हे विप्लव देव मुझे इस भंवर से निकालिए। मेरा डेटा पैक खत्म होने वाला है।


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