बैंक की नौकरी छोड़कर गरीब बच्चों को पढ़ा रहीं हैं तरुणा, आइए इस खुशी में हम भी शरीक हो जाएं

286

हमारा समाज असंख्य प्रेरक कहानियों से भरा पड़ा है। तरुणा को ही ले लीजिए। गाजियाबाद की तरुणा यूं तो बैंक में अच्छी खासी नौकरी करती थीं। सैलरी भी शानदार थी। वक्त पर अकाउंट में क्रेडिट हो जाती थी। ना किसी के सामने हाथ फैलाना पड़ता था और ना ही चंदे की चिंता रहती थी। और क्या चाहिए? फिलहाल मिडिल क्लाय यूथ की सोच तो यही है ना, एक सरकारी नौकरी लग जाए, अच्छी सेलरी मिल जाए. एक घर बना लें, एक कार और एक बढ़िया मोबाइल और बस। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जरा इससे आगे भी सोचते हैं। अच्छी सेलरी के बावजूद उनको चिंता रहती है। अपना पेट भरा रहने के बावजूद उनको चिंता रहती है। तरुणा को भी यही चिंता रहती थी।

   

दरअसल तरुणा ने अपना शुरुआती जीवन मुफलिसी में काटा। उन्हें पता था कि थाली में भूख का आधा खाना हो तो क्या एहसास होते हैं। तरुणा को उनकी यादों ने चैन से रहने न दिया। बैंक में नौकरी के दौरान ही तरुणा ने 2012 में गाजियाबाद में कुछ बच्चों को पढ़ाना शुरु किया। ये ऐसे बच्चे थे जिनके मां बाप कमजोर आर्थिक बैकग्राउंड से आते थे। शाम पांच बजे बैंक की नौकरी खत्म करने के बाद तरुणा बच्चों के बीच पहुंचती और उनके साथ वक्त गुजराती। जल्द ही तरुणा को बच्चों के साथ बिताया जाने वाला समय कम लगने लगा। लिहाजा तरुणा ने नौकरी छोड़ दी। अपने कुछ दोस्तों साथ लेकर उन्होंने गरीब बच्चों की स्कूलिंग का इंतजाम किया। यही नहीं तरुणा और उनके दोस्त मिलकर इन बच्चों को एक समय का खाना भी खिलाते हैं।

taruna story 2

फिलहाल तरुणा और उनके दोस्तों ने एक NGO बना लिया है। उसी NGO के तले वो इन गरीब बच्चों को उनके पैरों पर खड़ा होने का हुनर सिखा रहीं हैं। तरुणा को लगता है कि शायद वो अब अपनी बैंक की नौकरी से कहीं अधिक बेहतर और संतोष देने वाला काम कर रहीं हैं।

taruna 3

आप चाहें तो तरुणा और उनके NGO की मदद कर सकते हैं। बहुत अधिक नहीं देना चाहते तो भी 100 रुपए का योगदान खुद और अपने दोस्तों से तो करा ही सकते हैं। आखिर हम सब तरुणा जैसे तो नहीं बन सकते लेकिन किसी को तरुणा बनाए रखने में मदद तो कर ही सकते हैं। आप अपना योगदान देने के लिए यहां क्लिक करें – DONATE

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here