amu and jinaah

jinaah and gandhi

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...

सांप्रदायिक आग का कड़वा ‘धुआँ’- सत्यदेव त्रिपाठी

पिछले दिनों संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गुलज़ार साहब की कहानी 'धुआँ' का मंचन मुम्बई के 'जुहू जागृति' हाल में हुआ। आज...

सिर्फ सानंद नहीं मरे, मरी तो उम्मीदें हैं…बिल्कुल मुर्दा जैसी…

एक ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चैंपियन ऑफ अर्थ का पुरुस्कार ले रहे थे तकरीबन उसी दौरान स्वामी सानंद गंगा की निर्मलता के...

‘मंटो’ : सच के आईने की त्रासदी….

मैं अपनी कहानियों को एक आईना समझता हूँ, जिसमें समाज अपने को देख सके। -और यदि सूरत ही बुरी हो, तो आईने का क्या...? -मैं सोसाइटी...

नाम क्या है तुम्हारा – आसिफ। अच्छा तो मुस्लिम हो….

 नाम -आसिफ, उम्र-25 बरस, शिक्षा-ग्रेजुएट पिता का नाम-अब्बास, उम्र 55 बरस, पेशा-पत्रकार मां का नाम-लक्ष्मी, उम्र 48 बरस, पेशा-पत्रकारिता की शिक्षिका जो नाम लिखे गये हैं, वे...