हम सब के भीतर एक शोर है, मुंबई में अब शोर की खिलाफत है

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ये भी दिलचस्प है कि हम प्रदूषण को भी कैटेगरी में बांट कर देखते हैं। मानों कोई गलत काम किस तरह का गलत काम है और कितना गलत है पहले ये तय करते हैं और फिर उसके रोकथाम की शुरुआत करते हैं। अपनी गलतियों के प्रति हमारा ये नजरिया हमें गलतियों को कुछ देर के लिए सही मान लेने की एडजस्टेबल ताकत देता है।

खैर छोड़िए, खबर ये है कि हम अपने भीतर के शोर को भले ही कम न कम कर पा रहें हों लेकिन मुंबई में इन दिनों सड़कों पर पसरे शोर को दूर करने की कोशिश बड़ी शिद्दत के साथ हो रही है। ये शुरुआत एक स्वयंसेवी संस्था, महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट और मुंबई पुलिस के सहयोग से हुई है। इसके तहत मुंबई में हॉर्न व्रत की शुरुआत की गई है। ये व्रत आपको शोर से मुंह मोड़ने के लिए कहता है। और आपसे कहता है कि #donothonk

donot honk in mumbai

मुंबई में गाड़ियों से होने वाला शोर अब खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। पूरे शोर का 70 फीसदी शोर गाड़ियों से आता है। लाल बत्ती पर रुकने में शोर है, सिग्नल ग्रीन होने में भी शोर है। मुंबई का ये शोर अब मुंबई को चिड़चिड़ा और बीमार कर रहा है। यही वजह है कि अब मुंबई में गाड़ियों के शोर को कम करने की मुहिम शुरु की गई है। खासतौर पर ऑटो, टैक्सियों के हॉर्न को कम करने की कवायद हो रही है।


अब अगली बार जब आप मुंबई जाएं और आपको गेट वे ऑफ इंडिया पर बहुत से हॉर्न से सजा एक ऑटो दिखाई दे तो समझ लीजिएगा कि आपको शोर के खिलाफ खड़े होना है। वैसे चलते चलते आपको ये भी जान लेना चाहिए कि मुंबई में औसतन एक घंटे में एक वाहन 48 बार हॉर्न बजाता है या एक घंटे में पूरे मुंबई में 18 मिलियन बार हॉर्न बजता है। तो कम बजाइए, खुश रहिए, खुश रखिए।

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