अगर आपने बनारस की गलियां नहीं देखीं तो जल्दी करिए क्योंकि नरेंद्र मोदी जल्दी में हैं

जी, सौ फीसदी का निनयानबे भी नहीं। पूरा का पूरा सौ फीसदी। अगर आपने कभी बनारस की गलियों के बारे में सुना है, अपने...

ये भी दिलचस्प दौर है, बच्चे आएं पढ़ने तो स्कूल को रंगा ट्रेन जैसा

न जाने ये कौन सा दौर है जब स्कूलों की इमारतों को दिलचस्प बनाया जाता है। पढ़ाई है तो जरूरी लेकिन पढ़ने के लिए...

एक विकलांग बच्चे की जिंदगी बदलने वाला ये पुलिस अधिकारी हम सब के लिए नजीर है

हालांकि ऐसा कम ही होता है कि आपको खाकी वर्दी के साथ अपनत्व का एहसास हो। फिर उनसे चैरिटी की उम्मीद तो आप शायद...

काश, देश का हर गंदा तालाब ‘कुसुम’ हो जाए…

अगर प्रशासन का जिम्मा संभालने वाले अधिकारी ढृढ़ इच्छाशक्ति से काम करें और सत्ता उनका पूरा सहयोग करे तो असंभव सा लगने वाला काम...

हम सब के भीतर एक शोर है, मुंबई में अब शोर की खिलाफत है

ये भी दिलचस्प है कि हम प्रदूषण को भी कैटेगरी में बांट कर देखते हैं। मानों कोई गलत काम किस तरह का गलत काम...
राधेश्याम मिश्र को आप जानते हैं? नहीं जानते? जानेंगे भी कैसे? वैसे जानकर करेंगे भी क्या? राधेश्याम नंगे बदन गंगा किनारे टहलते हुए नजर आ जाएंगे। वो कोई सेलिब्रिटी एटीट्यूड नहीं हैं। उनके चेहरे पर लाइमलाइट सा ईगो भी नहीं नजर आता। लेकिन हैं अजीब शख्स। एकदम बनारसी जैसे। बनारस में गंगा...
हो सकता है कि आप सुहैब इलियासी का नाम भूल गए हों लेकिन दिल्ली की अदालतों में इस नाम की पुकार पिछले सत्रह सालों से लगती चली आ रही थी। वकील जिरह करते रहे और जज फैसले की जमीन तैयार करते। सत्रह सालों बाद सुहैब इलियासी के मासूम चेहरे...
narendra modi in public meeting
पिछले तीन सालों में हमें ऐसी आदत हो गई है मानों हम ये स्वीकार नहीं कर पाते कि नरेंद्र मोदी की सभा हो और कुर्सियां खाली हों। आमतौर पर ऐसा हुआ भी कम है कि नरेंद्र मोदी सभा करें और कुर्सियां खाली रहें। देश के अन्य हिस्सों में तो...
bhopal gas tragedy image by raghu rai
यूनियन कार्बाइड का कारखाना भोपाल शहर के एक छोर पर राक्षस की तरह खड़ा दूर तक फैली बस्ती की ओर देख रहा है. रविवार की उस ठंडी रात कुछ कोहरा था. सरकारी लट्टुओं से जो आभा फैल रही थी, वह अंधेरे को दूर नहीं कर पा रही थी. लोग...
himalayas, landscape
दुनिया में हिमालय तीसरी ऐसी जगह जहां सबसे अधिक बर्फ पाई जाती है। कहने वाले इसे नार्थ और साउथ पोल के बाद थर्ड पोल भी कहते हैं। हिमालय इस दुनिया जहान की बड़ी, बड़ी मतलब बड़ी आबादी को जिंदा रखता है। दक्षिण पूर्व एशिया के लिए ये हिमालय एक...
ancient image of somnath temple, gujrat, India
रवीश कुमार। 1026 में सोमनाथ मंदिर पर महमूद ग़ज़नी हमला करता है। इस घटना को लेकर आज तक नई नई व्याख्याएं होती रहती हैं और उस पर धारणाओं की परतें चढ़ाई जाती रहती हैं। उस वक्त भी और उसके बाद की सदियों में सोमनाथ मंदिर को लेकर अलग अलग...
इस बात की पूरी उम्मीद है कि 1973 से भारत के तत्कालीन उत्तर प्रदेश (अब उत्तराखंड) के चमोली जिले से शुरू हुए चिपको आंदोलन के बारे में आप बहुत कुछ भूल चुके होंगे। हो सकता है कि भारत की नई पीढ़ी को इस आंदोलन के नाम भर के बारे...
उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ों की गुफाओं में बनी शिवलिंग नुमां आकृतियां सैकड़ों वर्षों तक मौसम में हुए बदलावों का लेखा जोखा समेटे हुए हैं। इस बात का खुलासा हाल ही में हुई एक रिसर्च में हुआ है। इस शोध की मदद से पिछले सैंकड़ों सालों में हुए जलवायु परिवर्तन...
सत्यदेव त्रिपाठी। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ पर्दे पर आने के पहले ही इतनी बेपर्द हुई कि अंत में एक दिसम्बर के रिलीज़ पर रोक ही लग गयी...! पूरे प्रकरण पर मीडिया में इतने पृष्ठ रंगाये और इतने लोगों ने बयान-मंतव्य दिये, जिसका हिसाब भी मुश्किल है. पर...
ये कहानी भारतीयों के लिए शर्मसार करने वाली हो सकती है। आस्ट्रेलिया के फोर कार्नर्स मीडिया समूह के जरिए अडानी समूह की भारत और ऑस्ट्रेलिया में कामकाज पर बनाई रिपोर्ट कई हैरतअंगेज खुलासे करती है। हालांकि ये भी सच है कि भारतीय मीडिया समूहों के 'गिरोह' में आपको ऐसी...
हमारा समाज असंख्य प्रेरक कहानियों से भरा पड़ा है। तरुणा को ही ले लीजिए। गाजियाबाद की तरुणा यूं तो बैंक में अच्छी खासी नौकरी करती थीं। सैलरी भी शानदार थी। वक्त पर अकाउंट में क्रेडिट हो जाती थी। ना किसी के सामने हाथ फैलाना पड़ता था और ना ही...
ये दुनिया बेमिसाल जज्बा रखने वालों से भरी पड़ी है। आप तलाशने निकलेंगे एक को तो सौ मिलेंगे। ऐसी ही एक बेमिसाल जज्बे की नायाब नजीर हैं भारत की दो महिलाएं। एक हैं बंगलुरू की डाक्टर राजलक्ष्मी और दूसरी हैं नोएडा की प्रिया भार्गव। ये दोनों ही महिलाएं हर...
प्रियदर्शन। मृणाल पांडे में बाकी जो भी दुर्गुण हों, वे असभ्य और अशालीन होने के लिए नहीं जानी जातीं. वे किसी रूप में वामपंथी भी नहीं हैं. उन पर बीजेपी विरोधी होने का भी वैसा इल्ज़ाम नहीं रहा है, जैसा दूसरों पर है. पचास के शुरुआती वर्षों का एक कार्टून है...
आने वाले कई पीढ़ियों और बीती कई पीढ़ियों ने ऐसे हालातों का ऐसा संक्रमण शायद ही कभी देखा हो जैसा ये पीढ़ी देख रही है। यही वो पीढ़ी है जो अभिव्यक्ति की आजादी के लिए शायद अब तक की सबसे मुखर पीढ़ियों में से एक है और यही पीढ़ी...
अगर आप एक इंसान हैं तो बच्चों की मौतें आपको अंदर तक झकझोर कर रख ही देंगी। हो सकता है कि आप कुछ कम भावुक हों तो आपको 60 बच्चों की पहले गोरखपुर में मौत और फिर फरुखाबाद में 14 बच्चों की मौतें कुछ कम सदमा पहुंचाएंगी और आप...