‘मंटो’ : सच के आईने की त्रासदी….

मैं अपनी कहानियों को एक आईना समझता हूँ, जिसमें समाज अपने को देख सके। -और यदि सूरत ही बुरी हो, तो आईने का क्या...? -मैं सोसाइटी...

नाम क्या है तुम्हारा – आसिफ। अच्छा तो मुस्लिम हो….

 नाम -आसिफ, उम्र-25 बरस, शिक्षा-ग्रेजुएट पिता का नाम-अब्बास, उम्र 55 बरस, पेशा-पत्रकार मां का नाम-लक्ष्मी, उम्र 48 बरस, पेशा-पत्रकारिता की शिक्षिका जो नाम लिखे गये हैं, वे...

प्रकाश नामदेव ठाकरे : इतने हुए ‘मज़बूर’ कि ख़ुद्दार हो गए…

नाम है - प्रकाश नामदेव ठाकरे।  महाराष्ट्र के इतने महान संत कवि नामदेव एवं इतने बडे नेता के (बाल) ठाकरे के नामों के साथ...

अब मीडिया सरकार पर नहीं, सरकार मीडिया पर नजर रखती है, पढ़िए मास्टर स्ट्रोक वाले पुण्य प्रसून की कलम से

दिल्ली में सीबीआई हेडक्वार्टर के ठीक बगल में है सूचना भवन. सूचना भवन की 10वीं मंज़िल ही देश भर के न्यूज़ चैनलों पर सरकारी...

चुप रहिए, सरकार अगर भगवा हो तो बच्चियों से जिस्मफरोशी का आरोप धुल जाता है

चुप रहना हमने कब सीखा? तब जब हमने केंद्र में अपार बहुमत की सरकार बनाई या फिर तब जब हमने यूपी में एक आक्रामक...
RAVISH KUMAR. तथ्यों को कैसे तोड़ा-मरोड़ा जाता है, आप प्रधानमंत्री से सीख सकते हैं. मैं इन्हें सरासर झूठ कहता हूं, क्योंकि यह खास तरीके से डिज़ाइन किए जाते हैं और फिर रैलियों में बोला जाता है. गुजरात चुनावों के समय मणिशंकर अय्यर के घर की बैठक वाला बयान भी इसी श्रेणी...
PRIYADARSHAN. मोहम्मद अली जिन्ना की वजह से देश दो हिस्सों में बंट गया. वे भारत विभाजन के गुनहगार हैं. उनकी मदद से अंग्रेजों ने देश बांट दिया. इसलिए आ़ज़ाद भारत में उनकी तस्वीर की कोई जगह नहीं है. यह तर्क इतना सहज और सरल लगता है कि उनकी तस्वीर...
viplav dev
वैधानिक चेतावनी – फालतू समय हो तभी पढ़िए। राजनीति सिर्फ संभावनाओं का नहीं भयंकर संभावनाओं का क्षेत्र है। विडंबना ये कि जो पांचवीं पास न कर पाए वो शिक्षा विभाग की नीतियां बनाएं। और जो बीटेक एमटेक कर पाए वो नारद को गूगल बताए। दिलचस्प है ये राष्ट्रवाद। दरअसल त्रिपुरा के...
जी, सौ फीसदी का निनयानबे भी नहीं। पूरा का पूरा सौ फीसदी। अगर आपने कभी बनारस की गलियों के बारे में सुना है, अपने घर के बड़े बुजुर्गों से इन गलियों की खूबियों को जाना है या फिर गूगल बाबा की मेहरबानी से बनारस के बारे में ज्ञान बटोरा...
school painted as train in rajasthan alwar
न जाने ये कौन सा दौर है जब स्कूलों की इमारतों को दिलचस्प बनाया जाता है। पढ़ाई है तो जरूरी लेकिन पढ़ने के लिए स्कूलों तक कोई नहीं आना चाहता। खैर, छोड़िए। एक स्कूल के रंग रोगन की बात बताते हैं। ये स्कूल सरकारी है और दूर से देखिए...
police cop bharat bhushan tiwari
हालांकि ऐसा कम ही होता है कि आपको खाकी वर्दी के साथ अपनत्व का एहसास हो। फिर उनसे चैरिटी की उम्मीद तो आप शायद सपने में भी न कर पाएं। और मसला यूपी पुलिस से जुड़ा हो तो फिर तो आपको आमतौर पर ऐसा सोचने के बारे में कोई...
video
अगर प्रशासन का जिम्मा संभालने वाले अधिकारी ढृढ़ इच्छाशक्ति से काम करें और सत्ता उनका पूरा सहयोग करे तो असंभव सा लगने वाला काम भी संभव किया जा सकता है। हम यहां ओडिशा  के जाजपुर की एक वीडियो स्टोरी पोस्ट कर रहें हैं।              ...
donot honk in mumbai
ये भी दिलचस्प है कि हम प्रदूषण को भी कैटेगरी में बांट कर देखते हैं। मानों कोई गलत काम किस तरह का गलत काम है और कितना गलत है पहले ये तय करते हैं और फिर उसके रोकथाम की शुरुआत करते हैं। अपनी गलतियों के प्रति हमारा ये नजरिया...
lady molested
var aax_size='728x90'; var aax_pubname = 'myagnivaartab-21'; var aax_src='302'; हो सकता है कि शीर्षक आपको बुरा लगे लेकिन वर्तमान समाज के अध्ययन और अनुभव के आधार पर...
भरोसा कहीं भी मिल सकता है और कहीं भी टूट सकता है। भरोसा बिन आधार कार्ड के देश के किसी भी कोने में रहता हुआ मिल जाएगा। हालांकि कई बार ये आधार मांगने के लिए हमेशा फोन करने वाली संस्थाओं में भी ढूंढ़े भी नहीं मिलेगा। भरोसा पंजाब नेशनल...
seedhi rang mahotsav
सीधी (सिद्धगिरि) में रंगकर्म की अनगूँज तो सुनायी पडी थी, पर देखने के पहले तक उम्मीद न थी कि वहाँ रोशनी के साथ नीरज कुन्देर और नरेन्द्र बहादुर सिंह के जुनूनेफ़न में ज़मीन से जुडा हुआ इतना अच्छा रंगकर्म हो रहा है। और रंगकर्म ही नहीं, उस अंचल की...
सत्यदेव त्रिपाठी।  आख़िर भंसाली के थैले से बिल्ली बाहर आ ही गयी...(द कैट इज़ आउट ऑफ भंसालीज़ बैग)!! और थैले में हमेशा के लिए बन्द कर रखने की मंशा रखने वालों ने भी देख लिया कि यह बिल्ली वैसी क़तई नहीं है, जैसा सोचकर उसे बाहर आने से रोका...
आज मेरी बेटी बताए वक्त से बीस मिनट देर से घर पहुंची. लोगों को ये बात बेहद आम लगे लेकिन मैंने ये बीस मिनट किस दहशत में गुज़ारे हैं ये शब्दों से बयान कर पाना मुश्किल है. एक एक लम्हा पहाड़ जितना भारी था. दरवाजे और बालकनी के बीच...
उसे अपनी कोख से बेटियां पैदा करने का सुख तो नहीं मिला लेकिन बेटियों को पाल कर वो अपने मातृत्व का साया दो बेटियों पर जरूर डाले हुए है। ये कहानी बनारस के गुड़िया किन्नर की है। आमतौर पर किन्नर शब्द सुनते ही हमारे ख्याल से नर्म एहसासों का...
राधेश्याम मिश्र को आप जानते हैं? नहीं जानते? जानेंगे भी कैसे? वैसे जानकर करेंगे भी क्या? राधेश्याम नंगे बदन गंगा किनारे टहलते हुए नजर आ जाएंगे। वो कोई सेलिब्रिटी एटीट्यूड नहीं हैं। उनके चेहरे पर लाइमलाइट सा ईगो भी नहीं नजर आता। लेकिन हैं अजीब शख्स। एकदम बनारसी जैसे। बनारस में गंगा...