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Serena Williams is always a champion, even with her new born daughter

Two weeks after becoming a first-time mother, tennis superstar Serena Williams revealed her baby daughter to the world Wednesday in an...

‘चड्ढ़ी पहन कर फूल’ खिलाने वाले गीतकार का नाम तो नहीं पता होगा, गाने वाले का तो हरगिज नहीं

वैसे इस बात में हैरत नहीं होगी कि हममें से कइयों को चड्ढ़ी पहन कर फूल खिला है गीत की पंक्तियां...

भ्रूण हत्या वाला हरियाणा यू ट्यूब पर लड़कियों का डांस खूब देखता है

भले ही हरियाणा कोख में बेटियों को मारने के लिए कुख्यात हो लेकिन लड़कियों का डांस देखने का शौक हरियाणा में...

जो किसान मर गए वो कांग्रेसी थे, जो बचे हैं वो अपनी पार्टी तय कर लें

हैरानी होती है। किसानों के मसले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए लेकिन राजनीति के सिवा कुछ हो भी नहीं रहा है।...

आपको साईकिल चलाने में शर्म आती और आप पर्यावरण दिवस मनाते हैं, छी छी।

जरा याद करिए कि आपने पिछली बार साईकिल कब चलाई थी। नहीं याद आ रहा। चलिए छोड़िए। पर्यावरण दिवस तो मनाया...

सुकमा को बचा लीजिए, हमारे जवान भी बच जाएंगे

सुकमा में 25 जवानों की शहादत की खबर को यूं ही सुन कर भूल जाना संभव नहीं होता। आप इंसानी रिश्तों...

वक्त धंधे मातरम का है और लोग वंदे मातरम पेरे जा रहें हैं, पगला गए हैं क्या?

पियूष पांडे की एक पुस्तक है धंधे मातरम। पता नहीं इस किताब के अंदर क्या लिखा है लेकिन बाहर जो भी...
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बात मुद्दों की भी तो होनी चाहिए…

पत्रकारिता जीवन का एक बड़ा हिस्सा उत्तराखंड में बीत गया। इस दौरान कुछ बातें जो देश की राजनीति के बारे में...

सियासत के लिए उर्वरा भूमि पर नई उपज हैं अखिलेश यादव, खाद पानी के साथ, अभी लहलहाते रहेंगे।

उत्तर प्रदेश ने जिस क्षेत्र में सबसे अधिक विकास किया है वो है राजनीति। साल दर साल यूपी की जमीन...

माफ करना बिटिया रानी, हमारे पास रॉकेट है लेकिन एंबुलेंस नहीं

एक तरफ सोमवार को आंध्रप्रदेश के श्री हरिकोटा से पीएसएलवी सी – 35 की सफल लांचिंग की तस्वीरें आईं तो इसके...

शब्द राग – अमृता प्रीतम की वो कविता ‘मैं फिर मिलूंगी’

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अमृता प्रीतम की कविता 'मैं तुम्हे फिर मिलूंगी' को सुनना अच्छा लगता है। इस तरह देखना और सुनना भी सुकून देगा। आप चाहें तो...

हर लड़की में निहित अमृता को जगाना होगा….

सत्यदेव त्रिपाठी। रींवा जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित शहर के निवासी योगेश त्रिपाठी लिखित नाटक ‘मुझे अमृता चाहिए’ को मुम्बई के नये रंगसमूह ‘कारवाँ’ ने...

वो मां जो बच्चे को जिंदा रखने की खातिर उसे जी भर के सोने भी नहीं देती…

मैं और पूरा परिवार तो उस वक्‍त बेहद खुश था, जब यर्थाथ हमारी जिंदगी में आया. हमारी तो पूरी दुनिया ही उसके इर्द-गिर्द सिमट...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...

सांप्रदायिक आग का कड़वा ‘धुआँ’- सत्यदेव त्रिपाठी

पिछले दिनों संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गुलज़ार साहब की कहानी 'धुआँ' का मंचन मुम्बई के 'जुहू जागृति' हाल में हुआ। आज...