नरेंद्र मोदी तो फोटो शॉप वाली प्रिया, डॉली से लेकर रितिक तक को फॉलो करते हैं

गौरी लंकेश की हत्या के बाद एक शख्स की चर्चा खूब हो रही है। वो हैं निखिल दधीच। निखिल दो वजहों...

इस वीडियो में महिलाओं ने ऐसी तैसी कर रखी है और आप महिला सशक्तिकरण के फेर में फंसे हैं

आपने देश में हर ओर महिलाओं के सशक्तिकरण के नारे बिखरे पड़े हैं। कोशिश करेंगे तो पुरुषों के शौचालय में भी...

एक बच्चे को 40 थप्पड़ मार कर हम उसे ब्लू व्हेल के पास मरने के लिए भेज देंगे

लखनऊ से आई एक तस्वीर बेहद डरावनी है। लखनऊ के सेंट जॉन विने स्कूल में क्लास थर्ड के एक बच्चे को...

हमारे समाज का दोहरा चरित्र पूजा को बी ग्रेड फिल्मों में ले गया

हम भारतीय महिलाओं का बहुत सम्मान करते हैं। ऊपर लिखी लाइन जब आपको पढ़ने में बहुत अच्छी लगी होगी। लेकिन सच्चाई इन लाइनों...

आपका इंटरनेट आपकी निजता का रोज हनन करता और वो भी आपके सामने

आज की दुनिया में इंटरनेट से कोई भी अछूता नहीं है। आप खुद भी अब हर पल इंटरनेट से जुड़े रहना...

इसी भारत में महिलाओं को माहवारी की छुट्टी भी मिलती है और यहीं सेनेटरी पैड भी मयस्सर नहीं

हम जिस दौर में जी रहे होते हैं उसे अपने ही अतीत से हमेशा बेहतर मानते हैं। ये एक साधारण सामाजिक...

वो महिला जो तीन तलाक की जंग जीत चुकी थी लेकिन राजीव गांधी ने उसे संसद में हरा दिया था

ये वाक्या सन 1978 का है। मध्य प्रदेश के एक वकील हुआ करते थे मोहम्मद अहमद खां। साहब हुजूर ने अपनी...

हमारे ‘सोशल’ होने का साइड इफेक्ट है ‘ब्लू व्हेल’ का ‘आदमखोर’ होना

इन दिनों ब्लू व्हेल नाम के एक ऑनलाइन गेम की दहशत से पूरी दुनिया डरी हुई है। इस गेम के दिए...

माटुंगा की खुशी बांटी जाए, फिर खुशी बढ़ाने की सोची जाए

महाराष्ट्र का माटुंगा रेलवे स्टेशन हाल में पूरी तरह से महिलाओं के हाथ में दे दिया गया। ये देश का ऐसा...

एक पंद्रह अगस्त यहां भी मना लेकिन झंडा नहीं फहरा, बस चली ताकि बच्चियां स्कूल ना छोड़ें

कैसी कैसी दास्तां है इस देश में। अब यही दास्तां ले लीजिए जिसका जिक्र हम अपनी इस पोस्ट में करने जा...

वो मां जो बच्चे को जिंदा रखने की खातिर उसे जी भर के सोने भी नहीं देती…

मैं और पूरा परिवार तो उस वक्‍त बेहद खुश था, जब यर्थाथ हमारी जिंदगी में आया. हमारी तो पूरी दुनिया ही उसके इर्द-गिर्द सिमट...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...

सांप्रदायिक आग का कड़वा ‘धुआँ’- सत्यदेव त्रिपाठी

पिछले दिनों संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गुलज़ार साहब की कहानी 'धुआँ' का मंचन मुम्बई के 'जुहू जागृति' हाल में हुआ। आज...

सिर्फ सानंद नहीं मरे, मरी तो उम्मीदें हैं…बिल्कुल मुर्दा जैसी…

एक ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चैंपियन ऑफ अर्थ का पुरुस्कार ले रहे थे तकरीबन उसी दौरान स्वामी सानंद गंगा की निर्मलता के...

‘मंटो’ : सच के आईने की त्रासदी….

मैं अपनी कहानियों को एक आईना समझता हूँ, जिसमें समाज अपने को देख सके। -और यदि सूरत ही बुरी हो, तो आईने का क्या...? -मैं सोसाइटी...