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कबीरा खड़ा बाजार

बिक गयी ‘पद्मावत’ भंसाली की बज़ार में….

सत्यदेव त्रिपाठी।  आख़िर भंसाली के थैले से बिल्ली बाहर आ ही गयी...(द कैट इज़ आउट ऑफ भंसालीज़ बैग)!! और थैले में...

मासूम चेहरे वाला वो सुहैब इलियासी, मासूमियत से कत्ल कर कातिलों का पता बताने टीवी पर चला आया

हो सकता है कि आप सुहैब इलियासी का नाम भूल गए हों लेकिन दिल्ली की अदालतों में इस नाम की पुकार...
narendra modi in public meeting

कभी कभी नरेंद्र मोदी की सभा में भी कुर्सियां खाली रह जाती हैं, वो भी गुजरात में

पिछले तीन सालों में हमें ऐसी आदत हो गई है मानों हम ये स्वीकार नहीं कर पाते कि नरेंद्र मोदी की...
bhopal gas tragedy image by raghu rai

शरद जोशी ने बताया था, भोपाल मौत की बांहों में सिमटने लगा

यूनियन कार्बाइड का कारखाना भोपाल शहर के एक छोर पर राक्षस की तरह खड़ा दूर तक फैली बस्ती की ओर देख...
ancient image of somnath temple, gujrat, India

सोमनाथ मंदिर पर लिखा रवीश कुमार का ये लेख लंबा है, समय निकालकर पढ़ लीजिए

रवीश कुमार। 1026 में सोमनाथ मंदिर पर महमूद ग़ज़नी हमला करता है। इस घटना को लेकर आज तक नई नई व्याख्याएं...

जले जिस्मों की आंच में संस्कृति और सिनेमा

सत्यदेव त्रिपाठी। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ पर्दे पर आने के पहले ही इतनी बेपर्द हुई कि अंत में एक...

अडानी से जुड़े ये दो वीडियो बताएंगे कि भारत का भ्रष्टाचार अब ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच गया है

ये कहानी भारतीयों के लिए शर्मसार करने वाली हो सकती है। आस्ट्रेलिया के फोर कार्नर्स मीडिया समूह के जरिए अडानी समूह...

मृणाल पांडे के ट्वीट के बहाने प्रियदर्शन सुना गए कई किस्से, कार्टून नहीं बनना तो पढ़ना खूब रहेगा

प्रियदर्शन। मृणाल पांडे में बाकी जो भी दुर्गुण हों, वे असभ्य और अशालीन होने के लिए नहीं जानी जातीं. वे किसी रूप...

ये भी दिलचस्प दौर है, बच्चे आएं पढ़ने तो स्कूल को रंगा ट्रेन जैसा

school painted as train in rajasthan alwar
न जाने ये कौन सा दौर है जब स्कूलों की इमारतों को दिलचस्प बनाया जाता है। पढ़ाई है तो जरूरी लेकिन पढ़ने के लिए...

एक विकलांग बच्चे की जिंदगी बदलने वाला ये पुलिस अधिकारी हम सब के लिए नजीर है

police cop bharat bhushan tiwari
हालांकि ऐसा कम ही होता है कि आपको खाकी वर्दी के साथ अपनत्व का एहसास हो। फिर उनसे चैरिटी की उम्मीद तो आप शायद...

काश, देश का हर गंदा तालाब ‘कुसुम’ हो जाए…

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अगर प्रशासन का जिम्मा संभालने वाले अधिकारी ढृढ़ इच्छाशक्ति से काम करें और सत्ता उनका पूरा सहयोग करे तो असंभव सा लगने वाला काम...

हम सब के भीतर एक शोर है, मुंबई में अब शोर की खिलाफत है

donot honk in mumbai
ये भी दिलचस्प है कि हम प्रदूषण को भी कैटेगरी में बांट कर देखते हैं। मानों कोई गलत काम किस तरह का गलत काम...