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कबीरा खड़ा बाजार

चुप रहिए, सरकार अगर भगवा हो तो बच्चियों से जिस्मफरोशी का आरोप धुल जाता है

चुप रहना हमने कब सीखा? तब जब हमने केंद्र में अपार बहुमत की सरकार बनाई या फिर तब जब हमने यूपी...

परमानेंट काम की तलाश में जवानी स्वाहा, अस्थायी काम ही है पीएम मोदी का दिया रोजगार

‘फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में पूंजी से ज्यादा महत्व प्रतिभा का होगा. हाई स्किल परंतु अस्थायी वर्क रोज़गार का नया चेहरा होगा....

सब कुछ ओवर एक्सपोज्ड है, यही तो विकास है…

पता नहीं ये दुर्भाग्य है या सौभाग्य कि नरेंद्र मोदी बनारस से सांसद हैं और संयोग से प्रधानमंत्री भी हैं। यानी...

कबीर के बहाने काशी में हिंदुओं की आस्था से खेल तो नहीं रहे नरेंद्र मोदी, पूछना जरूरी है

सियासत अपने नफा नुकसान के लिए बड़ी महीन सी लकीरों को खाई में किस तरह बदल देती है ये समझना जरूरी...

हर चुनाव में प्रधानमंत्री झूठ का नायाब उदाहरण पेश करते हैं…

RAVISH KUMAR. तथ्यों को कैसे तोड़ा-मरोड़ा जाता है, आप प्रधानमंत्री से सीख सकते हैं. मैं इन्हें सरासर झूठ कहता हूं, क्योंकि यह खास...

जिन्ना की तस्वीर हटा देने भर से देशभक्ति के तकाज़े पूरे नहीं होंगे, कुछ और मूर्तियां गिरानी होंगी

PRIYADARSHAN. मोहम्मद अली जिन्ना की वजह से देश दो हिस्सों में बंट गया. वे भारत विभाजन के गुनहगार हैं. उनकी मदद...
viplav dev

महाभारत काल में इंटरनेट था और दुर्योधन का जनधन खाता मोदी सरकार ने खुलवाया था

वैधानिक चेतावनी – फालतू समय हो तभी पढ़िए। राजनीति सिर्फ संभावनाओं का नहीं भयंकर संभावनाओं का क्षेत्र है। विडंबना ये कि जो...

अगर आपने बनारस की गलियां नहीं देखीं तो जल्दी करिए क्योंकि नरेंद्र मोदी जल्दी में हैं

जी, सौ फीसदी का निनयानबे भी नहीं। पूरा का पूरा सौ फीसदी। अगर आपने कभी बनारस की गलियों के बारे में...
donot honk in mumbai

हम सब के भीतर एक शोर है, मुंबई में अब शोर की खिलाफत है

ये भी दिलचस्प है कि हम प्रदूषण को भी कैटेगरी में बांट कर देखते हैं। मानों कोई गलत काम किस तरह...

शब्द राग – अमृता प्रीतम की वो कविता ‘मैं फिर मिलूंगी’

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अमृता प्रीतम की कविता 'मैं तुम्हे फिर मिलूंगी' को सुनना अच्छा लगता है। इस तरह देखना और सुनना भी सुकून देगा। आप चाहें तो...

हर लड़की में निहित अमृता को जगाना होगा….

सत्यदेव त्रिपाठी। रींवा जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित शहर के निवासी योगेश त्रिपाठी लिखित नाटक ‘मुझे अमृता चाहिए’ को मुम्बई के नये रंगसमूह ‘कारवाँ’ ने...

वो मां जो बच्चे को जिंदा रखने की खातिर उसे जी भर के सोने भी नहीं देती…

मैं और पूरा परिवार तो उस वक्‍त बेहद खुश था, जब यर्थाथ हमारी जिंदगी में आया. हमारी तो पूरी दुनिया ही उसके इर्द-गिर्द सिमट...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...

सांप्रदायिक आग का कड़वा ‘धुआँ’- सत्यदेव त्रिपाठी

पिछले दिनों संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गुलज़ार साहब की कहानी 'धुआँ' का मंचन मुम्बई के 'जुहू जागृति' हाल में हुआ। आज...