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जिंदगी है यहां

प्रकाश नामदेव ठाकरे : इतने हुए ‘मज़बूर’ कि ख़ुद्दार हो गए…

नाम है - प्रकाश नामदेव ठाकरे।  महाराष्ट्र के इतने महान संत कवि नामदेव एवं इतने बडे नेता के (बाल) ठाकरे के...

पहाड़ की इन बेटियों की कहानी हमें ताकत देती है, पढ़ेंगे तो शायद कमजोरियां हारेंगी

उत्तराखंड के पहाड़ बदस्तूर जारी पलायन से वीरान होते जा रहे हैं, वहां न रोजी-रोटी का कोई संसाधन है, न शिक्षा...
school painted as train in rajasthan alwar

ये भी दिलचस्प दौर है, बच्चे आएं पढ़ने तो स्कूल को रंगा ट्रेन जैसा

न जाने ये कौन सा दौर है जब स्कूलों की इमारतों को दिलचस्प बनाया जाता है। पढ़ाई है तो जरूरी लेकिन...
police cop bharat bhushan tiwari

एक विकलांग बच्चे की जिंदगी बदलने वाला ये पुलिस अधिकारी हम सब के लिए नजीर है

हालांकि ऐसा कम ही होता है कि आपको खाकी वर्दी के साथ अपनत्व का एहसास हो। फिर उनसे चैरिटी की उम्मीद...

कोख में बेटियों को मारने वाले मर्दों से बेहतर है बेटियों को पालने वाली ये किन्नर

उसे अपनी कोख से बेटियां पैदा करने का सुख तो नहीं मिला लेकिन बेटियों को पाल कर वो अपने मातृत्व का...

बैंक की नौकरी छोड़कर गरीब बच्चों को पढ़ा रहीं हैं तरुणा, आइए इस खुशी में हम भी शरीक हो जाएं

हमारा समाज असंख्य प्रेरक कहानियों से भरा पड़ा है। तरुणा को ही ले लीजिए। गाजियाबाद की तरुणा यूं तो बैंक में...

वो व्हील चेयर पर चलती हैं और मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने निकली हैं, बेमिसाल है उनका जज्बा

ये दुनिया बेमिसाल जज्बा रखने वालों से भरी पड़ी है। आप तलाशने निकलेंगे एक को तो सौ मिलेंगे। ऐसी ही एक...

शब्द राग – अमृता प्रीतम की वो कविता ‘मैं फिर मिलूंगी’

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अमृता प्रीतम की कविता 'मैं तुम्हे फिर मिलूंगी' को सुनना अच्छा लगता है। इस तरह देखना और सुनना भी सुकून देगा। आप चाहें तो...

हर लड़की में निहित अमृता को जगाना होगा….

सत्यदेव त्रिपाठी। रींवा जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित शहर के निवासी योगेश त्रिपाठी लिखित नाटक ‘मुझे अमृता चाहिए’ को मुम्बई के नये रंगसमूह ‘कारवाँ’ ने...

वो मां जो बच्चे को जिंदा रखने की खातिर उसे जी भर के सोने भी नहीं देती…

मैं और पूरा परिवार तो उस वक्‍त बेहद खुश था, जब यर्थाथ हमारी जिंदगी में आया. हमारी तो पूरी दुनिया ही उसके इर्द-गिर्द सिमट...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...

सांप्रदायिक आग का कड़वा ‘धुआँ’- सत्यदेव त्रिपाठी

पिछले दिनों संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गुलज़ार साहब की कहानी 'धुआँ' का मंचन मुम्बई के 'जुहू जागृति' हाल में हुआ। आज...