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जिंदगी है यहां

school painted as train in rajasthan alwar

ये भी दिलचस्प दौर है, बच्चे आएं पढ़ने तो स्कूल को रंगा ट्रेन जैसा

न जाने ये कौन सा दौर है जब स्कूलों की इमारतों को दिलचस्प बनाया जाता है। पढ़ाई है तो जरूरी लेकिन...
police cop bharat bhushan tiwari

एक विकलांग बच्चे की जिंदगी बदलने वाला ये पुलिस अधिकारी हम सब के लिए नजीर है

हालांकि ऐसा कम ही होता है कि आपको खाकी वर्दी के साथ अपनत्व का एहसास हो। फिर उनसे चैरिटी की उम्मीद...

कोख में बेटियों को मारने वाले मर्दों से बेहतर है बेटियों को पालने वाली ये किन्नर

उसे अपनी कोख से बेटियां पैदा करने का सुख तो नहीं मिला लेकिन बेटियों को पाल कर वो अपने मातृत्व का...

बैंक की नौकरी छोड़कर गरीब बच्चों को पढ़ा रहीं हैं तरुणा, आइए इस खुशी में हम भी शरीक हो जाएं

हमारा समाज असंख्य प्रेरक कहानियों से भरा पड़ा है। तरुणा को ही ले लीजिए। गाजियाबाद की तरुणा यूं तो बैंक में...

वो व्हील चेयर पर चलती हैं और मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने निकली हैं, बेमिसाल है उनका जज्बा

ये दुनिया बेमिसाल जज्बा रखने वालों से भरी पड़ी है। आप तलाशने निकलेंगे एक को तो सौ मिलेंगे। ऐसी ही एक...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...

सांप्रदायिक आग का कड़वा ‘धुआँ’- सत्यदेव त्रिपाठी

पिछले दिनों संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गुलज़ार साहब की कहानी 'धुआँ' का मंचन मुम्बई के 'जुहू जागृति' हाल में हुआ। आज...

सिर्फ सानंद नहीं मरे, मरी तो उम्मीदें हैं…बिल्कुल मुर्दा जैसी…

एक ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चैंपियन ऑफ अर्थ का पुरुस्कार ले रहे थे तकरीबन उसी दौरान स्वामी सानंद गंगा की निर्मलता के...

‘मंटो’ : सच के आईने की त्रासदी….

मैं अपनी कहानियों को एक आईना समझता हूँ, जिसमें समाज अपने को देख सके। -और यदि सूरत ही बुरी हो, तो आईने का क्या...? -मैं सोसाइटी...

नाम क्या है तुम्हारा – आसिफ। अच्छा तो मुस्लिम हो….

 नाम -आसिफ, उम्र-25 बरस, शिक्षा-ग्रेजुएट पिता का नाम-अब्बास, उम्र 55 बरस, पेशा-पत्रकार मां का नाम-लक्ष्मी, उम्र 48 बरस, पेशा-पत्रकारिता की शिक्षिका जो नाम लिखे गये हैं, वे...