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देश की वो घटनाएं जो आप पर प्रभाव डालती हैं। जिन्हें एक अलग नजरिए से समझना भी जरूरी हो।

अंगुलियों पर गिनी जानी वाली मौतें अब मुट्ठियां भरने लगीं हैं

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पांच दर्जन से अधिक बच्चों की मौतें भारत के आधुनिक इतिहास में ना भूला जाना...

एक पंद्रह अगस्त यहां भी मना लेकिन झंडा नहीं फहरा, बस चली ताकि बच्चियां स्कूल ना छोड़ें

कैसी कैसी दास्तां है इस देश में। अब यही दास्तां ले लीजिए जिसका जिक्र हम अपनी इस पोस्ट में करने जा...

नहीं सुधरी गंगा की हालत, हो रही सिर्फ राजनीति

दिल्ली में बंगाल की सीमा पर फरक्का बांध के बहाने बिहार की तरफ आने वाले मलबे के कारण बढ़ते गाद, उत्तर...

प्रधानमंत्री जी, साथी बाई ने न आपका दूरदर्शन देखा और न ट्वीटर लेकिन वो रहती इसी देश में है

जी, ये सच है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस समय देश में पांच सौ और एक हजार के नोटों के चलन को...

तीन हेलिकॉप्टरों के काफिले में चलते प्रधानमंत्री और ठेले पर लदी गर्भवती।

इस देश के बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि इस देश का प्रधानमंत्री आसमान में भी तीन हेलिकॉप्टरों के काफिले...

हम बुलेट ट्रेन में बैठकर पुखरायां से होकर गुजर जाएंगे, मरने वाले तो मर ही गए।

ये अच्छा है कि देश बुलेट ट्रेन में बैठकर रेल का सफर करने के सपने देख रहा है या शायद राजनीतिक...

ये सोनम तो बेवफा नहीं है, चाहे तो अपनी आंखों से देख लो।

क्या करिएगा, आपको ये पता चल सके कि आप इंटरनेट के जिस वायरल मैसेज वाले मायावी दुनिया में रहते हैं उससे...

दोपहर की तपती धूप और नंगे पांव दौड़ता वो शहर, कलकत्ता जेहन में यूं उतरता है

कमल किशोर जोशी। कोलकाता को आधुनिक भारत की सबसे पुरानी नगरी कहा जा सकता है. सड़कों पर आज भी बेखौफ दौड़ती पीले रंग की...

शब्द राग – अमृता प्रीतम की वो कविता ‘मैं फिर मिलूंगी’

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अमृता प्रीतम की कविता 'मैं तुम्हे फिर मिलूंगी' को सुनना अच्छा लगता है। इस तरह देखना और सुनना भी सुकून देगा। आप चाहें तो...

हर लड़की में निहित अमृता को जगाना होगा….

सत्यदेव त्रिपाठी। रींवा जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित शहर के निवासी योगेश त्रिपाठी लिखित नाटक ‘मुझे अमृता चाहिए’ को मुम्बई के नये रंगसमूह ‘कारवाँ’ ने...

वो मां जो बच्चे को जिंदा रखने की खातिर उसे जी भर के सोने भी नहीं देती…

मैं और पूरा परिवार तो उस वक्‍त बेहद खुश था, जब यर्थाथ हमारी जिंदगी में आया. हमारी तो पूरी दुनिया ही उसके इर्द-गिर्द सिमट...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...