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देश की वो घटनाएं जो आप पर प्रभाव डालती हैं। जिन्हें एक अलग नजरिए से समझना भी जरूरी हो।

इंसान के बच्चे सड़क पर पैदा हो रहें हैं और अस्पतालों में मर रहें हैं लेकिन हम गाय बचा कर खुश हैं

दो घटनाएं हमारे देश के स्वास्थ सेवाओं की बदहाली की स्पष्ट नजीर हैं। एक खबर आई कि एक महिला ने सड़क...

चुप रहिए, सरकार अगर भगवा हो तो बच्चियों से जिस्मफरोशी का आरोप धुल जाता है

चुप रहना हमने कब सीखा? तब जब हमने केंद्र में अपार बहुमत की सरकार बनाई या फिर तब जब हमने यूपी...
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रोहिंग्या मुसलमानों को पानी पिलाते सिख की तस्वीर साझा करने वाला मस्जिद में लंगर भी कर चुका है

एक सिख की रोहिंग्या मुसलमानों को पानी पिलाने की तस्वीर इन दिनों खूब वॉयरल हो रही है। ये तस्वीर हरजिंदर सिंह...

वो शहनाई का जादूगर था, इंसानी जज्बातों का रखवाला भी, वो बिस्मिल्ला था

बिस्मिल्लाह खां को यूं तो पूरी दुनिया जानती है लेकिन जो लोग उनसे मिले थे वो बिस्मिल्ला खां को उनके संगीत...

सिर्फ सानंद नहीं मरे, मरी तो उम्मीदें हैं…बिल्कुल मुर्दा जैसी…

एक ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चैंपियन ऑफ अर्थ का पुरुस्कार ले रहे थे तकरीबन उसी दौरान स्वामी सानंद गंगा...

परमानेंट काम की तलाश में जवानी स्वाहा, अस्थायी काम ही है पीएम मोदी का दिया रोजगार

‘फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में पूंजी से ज्यादा महत्व प्रतिभा का होगा. हाई स्किल परंतु अस्थायी वर्क रोज़गार का नया चेहरा होगा....

कवि दुष्यंत कुमार का घर तोड़े जाने के बाद बृजेश राजपूत की ये स्टोरी शून्य के और गहरे होने का एहसास कराती है

जाने माने कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार का मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित घर तोड़ दिया गया है। स्मार्ट सिटी बनाने के...

आपका इंटरनेट आपकी निजता का रोज हनन करता और वो भी आपके सामने

आज की दुनिया में इंटरनेट से कोई भी अछूता नहीं है। आप खुद भी अब हर पल इंटरनेट से जुड़े रहना...

दोपहर की तपती धूप और नंगे पांव दौड़ता वो शहर, कलकत्ता जेहन में यूं उतरता है

कमल किशोर जोशी। कोलकाता को आधुनिक भारत की सबसे पुरानी नगरी कहा जा सकता है. सड़कों पर आज भी बेखौफ दौड़ती पीले रंग की...

शब्द राग – अमृता प्रीतम की वो कविता ‘मैं फिर मिलूंगी’

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अमृता प्रीतम की कविता 'मैं तुम्हे फिर मिलूंगी' को सुनना अच्छा लगता है। इस तरह देखना और सुनना भी सुकून देगा। आप चाहें तो...

हर लड़की में निहित अमृता को जगाना होगा….

सत्यदेव त्रिपाठी। रींवा जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित शहर के निवासी योगेश त्रिपाठी लिखित नाटक ‘मुझे अमृता चाहिए’ को मुम्बई के नये रंगसमूह ‘कारवाँ’ ने...

वो मां जो बच्चे को जिंदा रखने की खातिर उसे जी भर के सोने भी नहीं देती…

मैं और पूरा परिवार तो उस वक्‍त बेहद खुश था, जब यर्थाथ हमारी जिंदगी में आया. हमारी तो पूरी दुनिया ही उसके इर्द-गिर्द सिमट...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...