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देश की वो घटनाएं जो आप पर प्रभाव डालती हैं। जिन्हें एक अलग नजरिए से समझना भी जरूरी हो।

ये गौरी लंकेश की कलम से निकले आखिरी शब्द हैं, आपको पढ़ना चाहिए

गौरी लंकेश नाम है पत्रिका का। 16 पन्नों की यह पत्रिका हर हफ्ते निकलती है। 15 रुपये कीमत होती है। 13...

वो व्हील चेयर पर चलती हैं और मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने निकली हैं, बेमिसाल है उनका जज्बा

ये दुनिया बेमिसाल जज्बा रखने वालों से भरी पड़ी है। आप तलाशने निकलेंगे एक को तो सौ मिलेंगे। ऐसी ही एक...

नरेंद्र मोदी तो फोटो शॉप वाली प्रिया, डॉली से लेकर रितिक तक को फॉलो करते हैं

गौरी लंकेश की हत्या के बाद एक शख्स की चर्चा खूब हो रही है। वो हैं निखिल दधीच। निखिल दो वजहों...

ऑक्सीजन की कमी से उनके बच्चे मरे थे, कैसे बताऊं कि देश बुलेट ट्रेन में बैठेगा?

अगर आप एक इंसान हैं तो बच्चों की मौतें आपको अंदर तक झकझोर कर रख ही देंगी। हो सकता है कि...

ये हैं भारत के इकलौते बॉडी बिल्डर दंपत्ति, जीत चुके हैं कई मेडल, तीन बच्चे भी हैं

आपने कई प्रेम कहानियां सुनी होंगी। एक नाजुक सी लड़की, एक दिलदार सा लड़का, दोनों की आंखें लड़ी, इश्क हो गया,...

शहीद की पत्नी ने पति की जैकेट नहीं धोई ताकि उसे पहन कर पति को महसूस कर सके

देश की सरहदों पर हर पल निगहबानी करने वालों की मौत ना सिर्फ उनकी जिंदगी खत्म करती है बल्कि एक ऐसा...

सामने आए निखिल दधीच, ट्वीटर पर हंगामे के बाद अब डरे सहमे हैं फिर भी माफी नहीं मांगेंगे

पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद निखिल दधीच के एक ट्वीट को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा था। निखिल दधीच ने...

मैं चुप हूं, मैं चुप हूं, खतरे में नहीं मैं गौरी लंकेश

गौरी लंकेश की हत्या के बाद बोधिसत्व की ये कविता - अपना शुभ लाभ देख कर मैं चुप हूँ गौरी लंकेश एक एक कर मारे जा रहे हैं लोग और मैं चुप हूँ मैं चुप हूँ इसीलिए किसी भी खतरे में नहीं मैं गौरी लंकेश ?   मैं देख नहीं रहा उधर लोग मारे जा रहे हैं जिधर जिधर जहाँ आग लगी है जिधर संताप का सुराज है वह दिशा ओझल है मुझसे ।   सुनों गौरी लंंकेश ।   मैं बोलूँगा तो पद्मश्री नहीं मिलेगा मुझे मैं बोलूँगा तो पुरस्कार नहीं मिलेगा मुझे मैं बोलूँगा तो भारत रत्न नहीं बन पाऊँगा ।   देखो गौरी कितना सुखी हूँ और सुरक्षित हूँ मैं चुप रह कर कितना उज्जवल भविष्य है मेरा हर दिशा से शुभ और लाभ से घिरा हूँ ।   और कितना बोलूँंगा हर दिन होगी हत्या हत्यारे कितने कितने हैं कितने रूप में अनूठे और सर्वव्यापी कण-कण में है उनका प्रभाव उत्तर दक्षिण पूरब पच्छिम मध्य भारत सब में सर्वत्र समान हैं वे विराजमान ।   वे तो हत्यारे हैें उनसे कितना मुकाबला करूँगा कितनों को मारते रहेंगे किन किन का शोक मनाता रहूँगा गौरी ।   और जब हत्यारों को विरोध पसंद नहीं तो कुछ दिन चुप रह जाना क्या बुरा है उनके मन का दो एक नारा लगा देने में क्या चला जाता है मेरा या तुम्हारा गौरी ?   तो अब मान लो कि मेरे पास तक किसी गौरी लंकेश की हत्यारी सूचना नहीं हैै कौन था पनसारे कौन था दाभोलकर कौन था कलबुर्गी मैं किसी के शोक में नहीं ।   गोरखपुर का नाम मैं नहीं जानता मुजफ्फरपुर कहाँ है जापान में या चीन में या बांग्लादेश में यह जानकर भी क्या कर लूँगा गौरी लंकेश कौन थी? क्या थी यह जान कर क्या करूँगा ?   कितनी औरतों को घर में जलाते हैं कितने बच्चों को कितनेे बूढ़ों को किसानों को कब से मारते आ रहे हैं निर्विरोध अविरल अविराम तब भी तो चुप रहता हूँ मैं हे राम ।   ओह सावन भादौं के इन उत्फुल्ल दिनों में यह शोक रुदन का राग लिए मैं क्यों बैठूँ बादल घिर आए हैं तड़ित का मोहक अनुनाद झंकृत कर रहा है कातर हृदय को तन्वंगी कामनाओं के किल्लोल से बाहर क्यों देखूँ ।   देख रहा हूँ रातें बड़ी कोमल और पारदर्शी हो रही हैं आलोकित है विकट अंधकार दिखती है हर दिशा तार तार ।   देख रहा हूँ शामें कितनी बहुरंगी पर सब पर एक रंग का कफन चढ़ा है एक ही रंग का मुकुट मढ़ा है ।   और दिन दुपहरी नहीं झलकती राहें अकाल बेला सा हो जाता है संसार नहीं सुझाता किसी दिशा का वार पार ।   ऐसा युग पहले कभी नहीं आया था जब हाहाकार को मंगलगान सा समाज ने मिलकर गाया था जब शोक को समय ने माथे चढ़ाया था ऐसा युग पहले कभी नहीं आया था ।   ओह प्रज्वलित गौरी मैं इस लुभावने हाहाकार की आरती उतारूँगा मैं हत्यारों को 'भारत' और हत्या को 'यज्ञ' पुकारूँगा मैं हर दिन हर पल महायुद्ध हारूँगा ।   देखो मुझे पद्मश्री पाना है मुझे भारत रत्न होना है मुझे हर हत्या और शोक से परे रहना है मुझे केवल चुप रहना है ।   चुप रहना अब मेरा राष्ट्रीय धर्म है गौरी हत्या करना जैसे अब एक राष्ट्रीय कर्म है । मैं राष्ट्र धर्म निभाऊँगा मैं चुप रह कर हत्यारों की महिमा गुनगुनाऊँगा तभी तो मनचाहा पाऊँगा ।   तुम्हें मरना था तुम मरी मुझे जीना है मान मर्यादा का अमित हलाहल पीना है सुन लो गौरी लंकेश । अब मैं किसी हाल में शुभ और लाभ से ध्यान न हटाऊँगा मैं तो हत्या और हत्यारा गुन गाऊँगा । मैं गौरी लंकेश की तरह क्यों मारा जाऊँ मैं क्यों नहीं सब कुछ भूल कर एक विराट नींद सो जाऊँ ? क्यों नहीं मैं महामरण गान गाऊँ ? क्यों नहीं मैं तम आरोहण कर जाऊँ

‘साए में धूप’ लिखने वाले कवि दुष्यंत कुमार का घर सरकार ने तोड़ दिया है, स्मार्ट सिटी में वो फिट नहीं थे।

अगर आपने दुष्यंत कुमार के बारे में पढ़ा है, उनकी रचनाएं पढ़ीं हैं तो इसका मतलब है कि आपको दुष्यंत कुमार...

सद्गुरू की पर्यावरण बचाओ रैली से ही हो रहा है इतना प्रदूषण कि 80 लाख पेड़ लगाने पड़ेंगे

पर्यावरण के प्रति हमारी सोच किसी भी सूरत से बेहतर नहीं कही जा सकती है। हमारे विकास के मॉडल में ही...

कभी कभी नरेंद्र मोदी की सभा में भी कुर्सियां खाली रह जाती हैं, वो भी गुजरात में

narendra modi in public meeting
पिछले तीन सालों में हमें ऐसी आदत हो गई है मानों हम ये स्वीकार नहीं कर पाते कि नरेंद्र मोदी की सभा हो और...

शरद जोशी ने बताया था, भोपाल मौत की बांहों में सिमटने लगा

bhopal gas tragedy image by raghu rai
यूनियन कार्बाइड का कारखाना भोपाल शहर के एक छोर पर राक्षस की तरह खड़ा दूर तक फैली बस्ती की ओर देख रहा है. रविवार...

आपको हिमालय ने अब तक जिंदा रखा, आप उसे बचा भी लें तो बड़ी मेहरबानी होगी

himalayas, landscape
दुनिया में हिमालय तीसरी ऐसी जगह जहां सबसे अधिक बर्फ पाई जाती है। कहने वाले इसे नार्थ और साउथ पोल के बाद थर्ड पोल...

सोमनाथ मंदिर पर लिखा रवीश कुमार का ये लेख लंबा है, समय निकालकर पढ़ लीजिए

ancient image of somnath temple, gujrat, India
रवीश कुमार। 1026 में सोमनाथ मंदिर पर महमूद ग़ज़नी हमला करता है। इस घटना को लेकर आज तक नई नई व्याख्याएं होती रहती हैं...

हम्बख के जंगलों में पेड़ों से चिपके हैं लोग, ना जाने दुनिया का क्या होगा

इस बात की पूरी उम्मीद है कि 1973 से भारत के तत्कालीन उत्तर प्रदेश (अब उत्तराखंड) के चमोली जिले से शुरू हुए चिपको आंदोलन...