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देश की वो घटनाएं जो आप पर प्रभाव डालती हैं। जिन्हें एक अलग नजरिए से समझना भी जरूरी हो।

प्रकाश नामदेव ठाकरे : इतने हुए ‘मज़बूर’ कि ख़ुद्दार हो गए…

नाम है - प्रकाश नामदेव ठाकरे।  महाराष्ट्र के इतने महान संत कवि नामदेव एवं इतने बडे नेता के (बाल) ठाकरे के...

चुप रहिए, सरकार अगर भगवा हो तो बच्चियों से जिस्मफरोशी का आरोप धुल जाता है

चुप रहना हमने कब सीखा? तब जब हमने केंद्र में अपार बहुमत की सरकार बनाई या फिर तब जब हमने यूपी...

परमानेंट काम की तलाश में जवानी स्वाहा, अस्थायी काम ही है पीएम मोदी का दिया रोजगार

‘फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में पूंजी से ज्यादा महत्व प्रतिभा का होगा. हाई स्किल परंतु अस्थायी वर्क रोज़गार का नया चेहरा होगा....

इंदिरा का लगाया आपातकाल अब भी मौजूद है, रंग बदला है और नाम भी

आज सबसे पहले बात देश के लोकतांत्रिक इतिहास में काले धब्बे की तरह माने जाने वाले आपातकाल की। 25 जून 1975...

बनारस में जहां नरेंद्र मोदी ने फावड़ा चलाया था वहां अब राधेश्याम मिश्र बेचैन खड़े हैं, गंगा की तो पूछिए मत

राधेश्याम मिश्र को आप जानते हैं? नहीं जानते? जानेंगे भी कैसे? वैसे जानकर करेंगे भी क्या? राधेश्याम नंगे बदन गंगा किनारे टहलते हुए नजर...

वो व्हील चेयर पर चलती हैं और मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने निकली हैं, बेमिसाल है उनका जज्बा

ये दुनिया बेमिसाल जज्बा रखने वालों से भरी पड़ी है। आप तलाशने निकलेंगे एक को तो सौ मिलेंगे। ऐसी ही एक...

ऑक्सीजन की कमी से उनके बच्चे मरे थे, कैसे बताऊं कि देश बुलेट ट्रेन में बैठेगा?

अगर आप एक इंसान हैं तो बच्चों की मौतें आपको अंदर तक झकझोर कर रख ही देंगी। हो सकता है कि...

बनियान पहन के प्लेटफार्म पर स्प्राइट की बोतल में हैंडपंप का पानी भरने की आदत छोड़ दो, बुलेट ट्रेन चलने वाली है

गैंग्स ऑफ वासेपुर देखे हैं? नहीं भी देखे तो क्या कर लेंगे। लेकिन शानदार, जबरदस्त तो सुने ही होंगे। नहीं भी सुने...
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रोहिंग्या मुसलमानों को पानी पिलाते सिख की तस्वीर साझा करने वाला मस्जिद में लंगर भी कर चुका है

एक सिख की रोहिंग्या मुसलमानों को पानी पिलाने की तस्वीर इन दिनों खूब वॉयरल हो रही है। ये तस्वीर हरजिंदर सिंह...

अगर आप अब भी नहीं मानते कि चाय वाला मीडिया को चलाता है तो ये तस्वीर आपको देख लेनी चाहिए

याद है, हो सकता है न भी याद हो क्योंकि अब इसे बार बार दोहराने की फिलहाल जरूरत नहीं है। 2014...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...

सांप्रदायिक आग का कड़वा ‘धुआँ’- सत्यदेव त्रिपाठी

पिछले दिनों संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गुलज़ार साहब की कहानी 'धुआँ' का मंचन मुम्बई के 'जुहू जागृति' हाल में हुआ। आज...

सिर्फ सानंद नहीं मरे, मरी तो उम्मीदें हैं…बिल्कुल मुर्दा जैसी…

एक ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चैंपियन ऑफ अर्थ का पुरुस्कार ले रहे थे तकरीबन उसी दौरान स्वामी सानंद गंगा की निर्मलता के...

‘मंटो’ : सच के आईने की त्रासदी….

मैं अपनी कहानियों को एक आईना समझता हूँ, जिसमें समाज अपने को देख सके। -और यदि सूरत ही बुरी हो, तो आईने का क्या...? -मैं सोसाइटी...

नाम क्या है तुम्हारा – आसिफ। अच्छा तो मुस्लिम हो….

 नाम -आसिफ, उम्र-25 बरस, शिक्षा-ग्रेजुएट पिता का नाम-अब्बास, उम्र 55 बरस, पेशा-पत्रकार मां का नाम-लक्ष्मी, उम्र 48 बरस, पेशा-पत्रकारिता की शिक्षिका जो नाम लिखे गये हैं, वे...