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इस सेगमेंट में पर्यावरण से संबधित पोस्ट शामिल हैं।

himalayas, landscape

आपको हिमालय ने अब तक जिंदा रखा, आप उसे बचा भी लें तो बड़ी मेहरबानी होगी

दुनिया में हिमालय तीसरी ऐसी जगह जहां सबसे अधिक बर्फ पाई जाती है। कहने वाले इसे नार्थ और साउथ पोल के...

हम्बख के जंगलों में पेड़ों से चिपके हैं लोग, ना जाने दुनिया का क्या होगा

इस बात की पूरी उम्मीद है कि 1973 से भारत के तत्कालीन उत्तर प्रदेश (अब उत्तराखंड) के चमोली जिले से शुरू...
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काश, देश का हर गंदा तालाब ‘कुसुम’ हो जाए…

अगर प्रशासन का जिम्मा संभालने वाले अधिकारी ढृढ़ इच्छाशक्ति से काम करें और सत्ता उनका पूरा सहयोग करे तो असंभव सा...

इस हिमालय दिवस आपको जानना जरूरी है कि यहां तीस हजार पेड़ काटे जा रहें हैं, पहाड़ तोड़े जा रहे हैं

हिमालय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। पता नहीं आपको कब तक हिमालय दिवस की शुभकामनाएं दी जा पाएंगी। आपकी अगली पीढ़ियों के...
donot honk in mumbai

हम सब के भीतर एक शोर है, मुंबई में अब शोर की खिलाफत है

ये भी दिलचस्प है कि हम प्रदूषण को भी कैटेगरी में बांट कर देखते हैं। मानों कोई गलत काम किस तरह...

शब्द राग – अमृता प्रीतम की वो कविता ‘मैं फिर मिलूंगी’

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अमृता प्रीतम की कविता 'मैं तुम्हे फिर मिलूंगी' को सुनना अच्छा लगता है। इस तरह देखना और सुनना भी सुकून देगा। आप चाहें तो...

हर लड़की में निहित अमृता को जगाना होगा….

सत्यदेव त्रिपाठी। रींवा जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित शहर के निवासी योगेश त्रिपाठी लिखित नाटक ‘मुझे अमृता चाहिए’ को मुम्बई के नये रंगसमूह ‘कारवाँ’ ने...

वो मां जो बच्चे को जिंदा रखने की खातिर उसे जी भर के सोने भी नहीं देती…

मैं और पूरा परिवार तो उस वक्‍त बेहद खुश था, जब यर्थाथ हमारी जिंदगी में आया. हमारी तो पूरी दुनिया ही उसके इर्द-गिर्द सिमट...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...

सांप्रदायिक आग का कड़वा ‘धुआँ’- सत्यदेव त्रिपाठी

पिछले दिनों संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गुलज़ार साहब की कहानी 'धुआँ' का मंचन मुम्बई के 'जुहू जागृति' हाल में हुआ। आज...