‘साए में धूप’ लिखने वाले कवि दुष्यंत कुमार का घर सरकार ने तोड़ दिया है, स्मार्ट सिटी में वो फिट नहीं थे।

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    अगर आपने दुष्यंत कुमार के बारे में पढ़ा है, उनकी रचनाएं पढ़ीं हैं तो इसका मतलब है कि आपको दुष्यंत कुमार के बारे में जानकारी है। तो लगे हाथ अपनी जानकारी में एक जानकारी और जोड़ लीजिए कि दुष्यंत कुमार के देहांत के बाद भोपाल के जिस घर में उनसे जुड़ी यादें रहा करती थीं वो घर मध्य प्रदेश की सरकार ने गिरवा दिया है। दरअसल दुष्यंत कुमार का घर स्मार्ट सिटी के मानकों में फिट नहीं बैठ रहा था लिहाजा सरकार ने उसे तोड़ दिया है। हो सकता है कि आपको कुछ दिनों बाद ये जानकारी भी जोड़नी पड़े कि दुष्यंत कुमार के नाम पर बना संग्रहालय भी तोड़ दिया गया है। क्योंकि सरकार ने तीन महीने का नोटिस दिया है।21430073_10213895419242828_1600582889578497254_n

    ये वही दुष्यंत कुमार हैं जो लिखते हैं कि, “तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं”। उन्हीं दुष्यंत कुमार का वो घर सरकार ने तोड़ दिया है जहां बैठकर उन्होंने ‘साए में धूप’ को रहना सिखाया। भोपाल के मकान नंबर 69/8 में ‘जलते हुए वन का वसंत’ रहा करता था। ‘आवाजों के घेरे’ में ‘तीन दोस्त’ रहा करते थे। हो सकता है आपने दुष्यंत कुमार की ये कविताएं और संग्रह ना पढ़ें हों। लेकिन 30 दिसंबर 1975 को दुष्यंत कुमार के निधन के बाद ये सभी कविताएं, गजलें इसी 69/8 में रहा करती थीं।

    मध्यप्रदेश की सरकार भोपाल को स्मार्ट सिटी बनाने की तैयारी में है। एक ऐसी स्मार्ट सिटी जिसमें दुष्यंत कुमार फिट नहीं होते थे। उनका मकान सिर्फ मकान नहीं था। साहित्य की एक पूरी विधा थी। दुष्यंत ना होते तो आज हिंदी में गजलों का संसार सूना होता। सरकार ने अब दुष्यंत कुमार के नाम पर बने संग्रहालय को तोड़ने का मन बनाया है। इसके लिए नोटिस भी जारी कर दी गई है। आप चाहेंगे तो इस संग्रहालय को बचा सकते हैं लेकिन पता नहीं आप चाहेंगे या नहीं।

    फिलहाल मध्य प्रदेश सरकार भोपाल को स्मार्ट सिटी बना रही है लिहाजा घर तोड़े जा रहें हैं। हमें पता नहीं और हमने पहले कभी सुना भी नहीं कि ऐसे कामों के लिए किसी राजनीतिक हस्ती का एक कमरा भी तोड़ा गया हो। लेकिन ऐसी बातों का अब क्या हासिल। हम अपने अतीत को खत्म कर अपने भविष्य को बनाने की कोशिश कर रहें हैं। हो सकता है कि मध्य प्रदेश सरकार भोपाल में बनने वाली स्मार्ट सिटी में एक सड़क का नाम दुष्यंत कुमार के नाम पर रखने का एहसान कर दे या फिर चिड़ियों, कबूतरों, कौवों को बैठने लायक एक मूर्ति लगवा दे। फिर मत कहिएगा कि सरकारें कुछ करती नहीं। देखिए, दुष्यंत का घर तो तोड़ा है ना।


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