समय भी पुरुष

    1132

    सुना है समय हर जख्म भर देता है
    तुम्हे भी तो एक जख्म मिला था
    तुम सिसक के रोई थी
    आँखों में कुछ बूँदें ठहर कर
    पलकों से नीचें ढलक गयीं थी
    बेसुध सी तुम
    वक़्त का ख्याल भी नहीं रख पाई थी
    तुम्हारे दोनों हाथ खाली थे
    सिवाय हवा के उनमे कुछ कैद नहीं रह पाया था

    हर रिश्ता तो दूर ही था
    लोग कहते रहे
    वक़्त हर जख्म भर देगा
    पर
    क्या भर गया हर जख्म ?
    नहीं ना
    शायद समय भी पुरुष है ।


    Warning: mysqli_query(): (HY000/1030): Got error 28 from storage engine in /home/agnadfadfivaarta/public_html/wp-includes/wp-db.php on line 1938

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here