टच वुड

478
धीरे धीरे अब मौसम सर्द होने लगा है 
कमरे में आने वाली धूप अब अलसा गयी है 
गहरे रंग के कपड़ों से आलमारी भर गयी है 
ऊनी कपड़ों से आती नेफ्थलीन की महक तैर रही है 
कमरे में 
सुबह देर तक तुम्हारे आलिंगन में 
बिस्तर पर पड़ा हूँ 
ना तुम उठना चाहती हो 
ना मैं 
देखो हम साथ खुश हैं 
तुम हर बार की तरह कहती हो
टच वुड 
मैं भी कहता हूँ 
टच वुड 
तुम्हारे साथ घर तक का सफ़र हमेशा लम्बा लगता है 
हाँ, जब इसी रास्ते से 
स्टेशन जाता हूँ तो राह छोटी हो जाती 
मैं देर तक तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ 
हम हमेशा साथ रहेंगे 
तुम फिर कहती हो 
टच वुड 
मैं भी तुम्हारे साथ कहता हूँ 
टच वुड 
एक रिश्ते का ऐसा उत्सव 
विकल्पहीन है यह सौंदर्य 
तुम्हारी पतली ऊंगलियों के बीच में 
अपनी ऊंगलियों को डाल कर 
कितना कुछ पा जाता हूँ मैं 
तुम्हारे चेहरे पर तैरती हंसी भी 
बहुत अच्छी लगती है 
इस बार मैं पहले कहूँगा 
टच वुड 
बोलो 
अब तुम भी बोलो ना 
टच वुड 

4 COMMENTS

  1. touch wood 🙂 बहुत अच्छा लिखा है आपने ….समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है ..

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here