एक बच्चे को 40 थप्पड़ मार कर हम उसे ब्लू व्हेल के पास मरने के लिए भेज देंगे

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लखनऊ से आई एक तस्वीर बेहद डरावनी है। लखनऊ के सेंट जॉन विने स्कूल में क्लास थर्ड के एक बच्चे को उसकी टीचर क्लास में एक के बाद एक कई थप्पड़ मारते हुए सीसीटीवी कैमरे में दिख रही है। बच्चे का कसूर बस इतना था कि उसने अपना रोल नंबर पुकारे जाने पर जवाब नहीं दिया। रोल कॉल के दौरान बच्चा ड्राइंग बना रहा था और इस बात से नाराज टीचर ने  बच्चे को क्लास के सामने कई बार थप्पड़ मारे। बच्चे को ये पिटाई शरीर पर चोट तो दे ही गई मन को भी जख्मी कर गई। घर पहुंचने पर बच्चे का चेहरा देखकर मां बाप ने उसके दोस्तों से पूछा। जब पिटाई का पता चला तो घर वालों ने प्रिंसिपल से शिकायत की। सीसीटीवी देखने पर पता चला कि पिटाई तो हुई है। हालांकि टीचर ने इस कृत्य पर माफी मांग ली लेकिन बच्चे के घर वालों ने पुलिस कंप्लेन कर दी।

 

देश में इन दिनों ब्लू व्हेल की आफत है। बच्चों के बीच ये जानलेवा खेल बड़ी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कई बच्चों की ये खेल खेलते हुए जान भी जा चुकी है। सबसे पहला वाक्या मुंबई में सामने आया। वहां एक बच्चे ने ब्लू व्हेल गेम में दिए टास्क को पूरा करने के लिए अपनी बिल्डिंग से छलांग लगा कर अपनी जान दे दी। फिलहाल इस संबंध में स्कूलों को एडवाइजरी जारी कर दी गई है। सरकारें चाहती हैं कि स्कूल में टीचर्स बच्चों की एक्टिवटी पर ध्यान दें। उन्हें अकेला न छोड़ें और उनकी मानसिकता को समझने की कोशिश करें।

लखनऊ से आई तस्वीर और blue whale से लड़ने को जारी एडवाइजरी के बीच बेहद लंबा फासला है। अगर लखनऊ के स्कूल में घटी घटनाओं की पुनरावृति जारी रहती है तो ब्लू व्हेल से लड़ने की कोशिशे परवान नहीं चढ़ पाएंगी। तेजी से बदलते भारतीय परिवेश में बच्चों का स्थान लगातार सिकुड़ता जा रहा है। बच्चों के स्थान से मतलब सिर्फ उन्हें स्कूल और ट्यूशन भेजने भर का नहीं है। हमें बच्चों के बचपन को बचाना होगा। बदलती सामाजिक व्यवस्था में ढाई साल के बच्चे प्ले ग्रुप में जाने लगते हैं। ऐसे में उनके बचपन की शरारतों का हिस्सा कम हो जाता है। मां बाप बच्चे को हर हाल में तीन साल में स्कूलिंग सिस्टम में डाल देना चाहते हैं। मानों बच्चे स्कूल जाना शुरु करें तो घर में चार पांच घंटे की शांति हो। एकाकी परिवारों की परिकल्पना के बाद अब बच्चे स्कूल से घर लौटने के बाद अपने ग्रैंड पैरेंट्स से नहीं मिलते बल्कि उनकी मुलाकात टीवी, टैबलेट और मोबाइल्स से होती है। ये एक समाज के लिए घातक है। कई विकसित देशों में समाज के इस बदलाव पर अध्ययन के बाद नई बहस चल रही है। बच्चों से ग्रैंड पैरेंट्स की दूरी उनके मानसिक विकास में बाधक मानी जा रही है।

दरअसल ब्लू व्हेल ही नहीं हमारा बदलता सामाजिक परिवेश भी हमारे बच्चों के लिए घातक होता जा रहा है। हम हो सकता है कि ब्लू व्हेल गेम से अपने बच्चे को बचा लेेंगे लेकिन जिस तरह से हमारा सामाजिक ढांचा बदल रहा है उससे बच्चों पर पड़ते दुष्प्रभाव को रोकना बेहद जरूरी है। हम ऐसा कर पाने में अगर अक्षम रहे तो परिणाम घातक होंगे।

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