इसी भारत में है वो शहर, वो मकान, जहां लोग खुशी से मरने जाते हैं, मर गए तो नसीब उनका

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भारत में एक ऐसी भी जगह है जहां लोग मरने के लिए जाते हैं। मौत के इंतजार में बकायदा बुकिंग कराई जाती है। लोग भारत के अलग अलग हिस्सों से यहां पहुंचते हैं। यहां तक कि विदेशों से भी यहां मरने के लिए आते हैं। इस जगह का नाम है बनारस। वही बनारस जिसे भारत की सरकारी फाइलों मे वाराणसी और आध्यात्म जगत में काशी के नाम से भी जाना जाता है।

यही वो शहर है जहां लोग मरने के लिए आते हैं। दरअसल हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार काशी में मरने वालों को मोक्ष की प्राप्ती होती है। मान्यता है कि इस शहर में स्वयं शिव निवास करते हैं और यहां मरने वाले को वो स्वयं मोक्ष देते हैं। यही वजह है कि यहां लोग वृद्धावस्था में यहां मरने के लिए चले आते हैं। कई बार स्वयं परिवार के लोग अपने वृद्ध परिजनों को उनके अंतिम समय में इस शहर में ले आते हैं।

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 बनारस में एक भवन है जिसका नाम ही काशी लाभ – मुक्ति भवन। पुराने समय में बने इस घर में 12 कमरे हैं। इन कमरों में वो लोग रहते हैं जो मोक्ष की तलाश में काशी आते हैं। परिवार वाले अपने घर के बुजुर्गों को इस मुक्ति भवन में लेकर रहने आते हैं। हालांकि उनको इस भवन में रहने के लिए महज 2 हफ्ते का ही समय दिया जाता है। अगर इस बीच देहांत हो गया तो ठीक, वरना अगर जीवित रह गए तो कमरा खाली करना पड़ता है। कई बार लोग मुक्ति भवन को खाली कर अपने वृद्ध परिजनों को लेकर बनारस में किसी और जगह पर किराए में रहने लगते हैं।

बनारस शहर के मध्य में बना ये भवन सदियों पुराना है। अब तक हजारों लोग इस मुक्ति भवन में आकर काशी में मरकर मोक्ष पा चुके हैं। इस भवन में मोक्ष के लिए रहने वालों की तादाद भी खासी है। कई बार बाहर से आए लोगों को यहां कमरा भी नहीं मिल पाता।

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