हर लड़की में निहित अमृता को जगाना होगा….

सत्यदेव त्रिपाठी। रींवा जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित शहर के निवासी योगेश त्रिपाठी लिखित नाटक ‘मुझे अमृता चाहिए’ को मुम्बई के नये रंगसमूह ‘कारवाँ’ ने...

वो मां जो बच्चे को जिंदा रखने की खातिर उसे जी भर के सोने भी नहीं देती…

मैं और पूरा परिवार तो उस वक्‍त बेहद खुश था, जब यर्थाथ हमारी जिंदगी में आया. हमारी तो पूरी दुनिया ही उसके इर्द-गिर्द सिमट...

मोहल्ला अस्सी – बाज़ार के सामने घुटने टेकते फिल्मकार-रचनाकर

सत्यदेव त्रिपाठी: बाज़ार के आक्रमण से नष्टप्राय होते मूल्यों का मुद्दा अब इतना पुराना हो गया है कि उस पर कुछ कहना अमूमन इतना...

सांप्रदायिक आग का कड़वा ‘धुआँ’- सत्यदेव त्रिपाठी

पिछले दिनों संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गुलज़ार साहब की कहानी 'धुआँ' का मंचन मुम्बई के 'जुहू जागृति' हाल में हुआ। आज...

सिर्फ सानंद नहीं मरे, मरी तो उम्मीदें हैं…बिल्कुल मुर्दा जैसी…

एक ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चैंपियन ऑफ अर्थ का पुरुस्कार ले रहे थे तकरीबन उसी दौरान स्वामी सानंद गंगा की निर्मलता के...

‘मंटो’ : सच के आईने की त्रासदी….

मैं अपनी कहानियों को एक आईना समझता हूँ, जिसमें समाज अपने को देख सके। -और यदि सूरत ही बुरी हो, तो आईने का क्या...? -मैं सोसाइटी...
punya prasoon vajpayee/ agnivaarta.com
दिल्ली में सीबीआई हेडक्वार्टर के ठीक बगल में है सूचना भवन. सूचना भवन की 10वीं मंज़िल ही देश भर के न्यूज़ चैनलों पर सरकारी निगरानी का ग्राउंड ज़ीरो है. हर दिन 24 घंटे तमाम न्यूज़ चैनलों पर निगरानी रखने के लिए 200 लोगों की टीम लगी रहती है. बीते चार...
चुप रहना हमने कब सीखा? तब जब हमने केंद्र में अपार बहुमत की सरकार बनाई या फिर तब जब हमने यूपी में एक आक्रामक हिंदुत्व की छवि वाले शख्स को सत्ता का ताज पहनते देखा? हमने चुप्पियों को सहूलियतों के ढांचे में उतार लिया, हम तय करते हैं कि किन...
‘फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में पूंजी से ज्यादा महत्व प्रतिभा का होगा. हाई स्किल परंतु अस्थायी वर्क रोज़गार का नया चेहरा होगा. मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन डिजाइन मे मौलिक बदलाव आएगे. डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन और डेटा फ्लोस (प्रवाह) से भौगोलिक दूरियों का महत्व कम हो जाएगा. ई कॉमर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म मार्केट...
पता नहीं ये दुर्भाग्य है या सौभाग्य कि नरेंद्र मोदी बनारस से सांसद हैं और संयोग से प्रधानमंत्री भी हैं। यानी बनारस प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है। अब जब पीएम का संसदीय क्षेत्र है और उस पीएम का जो विकास को अपनी जेब में लिए घूमता है तो ये...
सियासत अपने नफा नुकसान के लिए बड़ी महीन सी लकीरों को खाई में किस तरह बदल देती है ये समझना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कबीर की जयंति के मौके पर कबीर के परिनिर्वाण स्थली मगहर में जाना और काशी में मोक्ष मिलने की अवधारणा को पाखंड बताना...
आज सबसे पहले बात देश के लोकतांत्रिक इतिहास में काले धब्बे की तरह माने जाने वाले आपातकाल की। 25 जून 1975 की वो तारीख जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाने की घोषणा की। देश स्तब्ध था और राजनीतिक दल हैरान। लेकिन इंदिरा तो इंदिरा थीं।...
उत्तराखंड के पहाड़ बदस्तूर जारी पलायन से वीरान होते जा रहे हैं, वहां न रोजी-रोटी का कोई संसाधन है, न शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था, ले-देकर पर्यटन व्यवसाय ही एक आसरा है, जिस तक सीमित लोगों की पहुंच, ऐसे में बाहर गईं यहां की बेटियां मल्टीनेशनल कंपनियों के लाखों...
RAVISH KUMAR. तथ्यों को कैसे तोड़ा-मरोड़ा जाता है, आप प्रधानमंत्री से सीख सकते हैं. मैं इन्हें सरासर झूठ कहता हूं, क्योंकि यह खास तरीके से डिज़ाइन किए जाते हैं और फिर रैलियों में बोला जाता है. गुजरात चुनावों के समय मणिशंकर अय्यर के घर की बैठक वाला बयान भी इसी श्रेणी...
PRIYADARSHAN. मोहम्मद अली जिन्ना की वजह से देश दो हिस्सों में बंट गया. वे भारत विभाजन के गुनहगार हैं. उनकी मदद से अंग्रेजों ने देश बांट दिया. इसलिए आ़ज़ाद भारत में उनकी तस्वीर की कोई जगह नहीं है. यह तर्क इतना सहज और सरल लगता है कि उनकी तस्वीर...
viplav dev
वैधानिक चेतावनी – फालतू समय हो तभी पढ़िए। राजनीति सिर्फ संभावनाओं का नहीं भयंकर संभावनाओं का क्षेत्र है। विडंबना ये कि जो पांचवीं पास न कर पाए वो शिक्षा विभाग की नीतियां बनाएं। और जो बीटेक एमटेक कर पाए वो नारद को गूगल बताए। दिलचस्प है ये राष्ट्रवाद। दरअसल त्रिपुरा के...
जी, सौ फीसदी का निनयानबे भी नहीं। पूरा का पूरा सौ फीसदी। अगर आपने कभी बनारस की गलियों के बारे में सुना है, अपने घर के बड़े बुजुर्गों से इन गलियों की खूबियों को जाना है या फिर गूगल बाबा की मेहरबानी से बनारस के बारे में ज्ञान बटोरा...
school painted as train in rajasthan alwar
न जाने ये कौन सा दौर है जब स्कूलों की इमारतों को दिलचस्प बनाया जाता है। पढ़ाई है तो जरूरी लेकिन पढ़ने के लिए स्कूलों तक कोई नहीं आना चाहता। खैर, छोड़िए। एक स्कूल के रंग रोगन की बात बताते हैं। ये स्कूल सरकारी है और दूर से देखिए...
police cop bharat bhushan tiwari
हालांकि ऐसा कम ही होता है कि आपको खाकी वर्दी के साथ अपनत्व का एहसास हो। फिर उनसे चैरिटी की उम्मीद तो आप शायद सपने में भी न कर पाएं। और मसला यूपी पुलिस से जुड़ा हो तो फिर तो आपको आमतौर पर ऐसा सोचने के बारे में कोई...
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अगर प्रशासन का जिम्मा संभालने वाले अधिकारी ढृढ़ इच्छाशक्ति से काम करें और सत्ता उनका पूरा सहयोग करे तो असंभव सा लगने वाला काम भी संभव किया जा सकता है। हम यहां ओडिशा  के जाजपुर की एक वीडियो स्टोरी पोस्ट कर रहें हैं।              ...
donot honk in mumbai
ये भी दिलचस्प है कि हम प्रदूषण को भी कैटेगरी में बांट कर देखते हैं। मानों कोई गलत काम किस तरह का गलत काम है और कितना गलत है पहले ये तय करते हैं और फिर उसके रोकथाम की शुरुआत करते हैं। अपनी गलतियों के प्रति हमारा ये नजरिया...