जले जिस्मों की आंच में संस्कृति और सिनेमा

सत्यदेव त्रिपाठी। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ पर्दे पर आने के पहले ही इतनी बेपर्द हुई कि अंत में एक दिसम्बर के रिलीज़...

अडानी से जुड़े ये दो वीडियो बताएंगे कि भारत का भ्रष्टाचार अब ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच गया है

ये कहानी भारतीयों के लिए शर्मसार करने वाली हो सकती है। आस्ट्रेलिया के फोर कार्नर्स मीडिया समूह के जरिए अडानी समूह की भारत और...

बैंक की नौकरी छोड़कर गरीब बच्चों को पढ़ा रहीं हैं तरुणा, आइए इस खुशी में हम भी शरीक हो जाएं

हमारा समाज असंख्य प्रेरक कहानियों से भरा पड़ा है। तरुणा को ही ले लीजिए। गाजियाबाद की तरुणा यूं तो बैंक में अच्छी खासी नौकरी...

वो व्हील चेयर पर चलती हैं और मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने निकली हैं, बेमिसाल है उनका जज्बा

ये दुनिया बेमिसाल जज्बा रखने वालों से भरी पड़ी है। आप तलाशने निकलेंगे एक को तो सौ मिलेंगे। ऐसी ही एक बेमिसाल जज्बे की...

मृणाल पांडे के ट्वीट के बहाने प्रियदर्शन सुना गए कई किस्से, कार्टून नहीं बनना तो पढ़ना खूब रहेगा

प्रियदर्शन। मृणाल पांडे में बाकी जो भी दुर्गुण हों, वे असभ्य और अशालीन होने के लिए नहीं जानी जातीं. वे किसी रूप में वामपंथी भी...

अभिव्यक्ति की आजादी है तो आंटी को बुलाएंगे नहीं तो महिला पत्रकार का रेप कर देंगे

आने वाले कई पीढ़ियों और बीती कई पीढ़ियों ने ऐसे हालातों का ऐसा संक्रमण शायद ही कभी देखा हो जैसा ये पीढ़ी देख रही...
गैंग्स ऑफ वासेपुर देखे हैं? नहीं भी देखे तो क्या कर लेंगे। लेकिन शानदार, जबरदस्त तो सुने ही होंगे। नहीं भी सुने तो क्या कर लेंगे। वैसे एक बात समझ लो कि ये जो आदत पड़ी है ना कि चालू का टिकट लीजिए और स्लीपर के डिब्बा (डब्बा) में घुस के...
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एक सिख की रोहिंग्या मुसलमानों को पानी पिलाने की तस्वीर इन दिनों खूब वॉयरल हो रही है। ये तस्वीर हरजिंदर सिंह कुकरेजा ने ट्वीटर पर साझा की  है। हरजिंदर की साझा की ये तस्वीर कुछ ही देर में वायरल होने लगी। लोग इसे रिट्वीट करने लगे। नौ हजार से...
याद है, हो सकता है न भी याद हो क्योंकि अब इसे बार बार दोहराने की फिलहाल जरूरत नहीं है। 2014 के आम चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी बार बार ये बताना नहीं भूलते थे कि वो चाय बेचा करते थे। अब ये बातें क्यों नहीं दोहराई जाती और...
देश की सरहदों पर हर पल निगहबानी करने वालों की मौत ना सिर्फ उनकी जिंदगी खत्म करती है बल्कि एक ऐसा शून्य उनके परिवार में भर जाती हैं। हम लाख मुआवजे दे लें लेकिन ऐसे शून्य को भर नहीं सकते। हम और आप जिनके घर में कोई सेना का...
अगर आपने दुष्यंत कुमार के बारे में पढ़ा है, उनकी रचनाएं पढ़ीं हैं तो इसका मतलब है कि आपको दुष्यंत कुमार के बारे में जानकारी है। तो लगे हाथ अपनी जानकारी में एक जानकारी और जोड़ लीजिए कि दुष्यंत कुमार के देहांत के बाद भोपाल के जिस घर में...
जाने माने कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार का मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित घर तोड़ दिया गया है। स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर दुष्यंत कुमार का घर राज्य सरकार ने तोड़ दिया है। दुष्यंत कुमार के नाम पर बना संग्रहालय तोड़ने का नोटिस दिया जा चुका है। इस तोड़फोड़...
पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने के लिए हम जाने-माने कॉलेजों में एडमिशन लेते हैं और महंगी-महंगी फीस देकर डिग्रियां हासिल करते है. तब भी वह मुकाम नहीं पा पाते जो पाना चाहते है. एक चैनल से लेकर एक अखबार छापने के लिए कई जतन करने पड़ते है…पूरा का पूरा...
पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद निखिल दधीच के एक ट्वीट को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा था। निखिल दधीच ने एक ट्वीट कर गौरी लंकेश पर अभद्र टिप्पणी की थी। हालांकि अब हंगामे के बाद निखिल दधीच सफाई दे रहें हैं कि उन्होंने गौरी लंकेश को टारगेट कर...
पर्यावरण के प्रति हमारी सोच किसी भी सूरत से बेहतर नहीं कही जा सकती है। हमारे विकास के मॉडल में ही खोट नजर आता है। अब तो पर्यावरण बचाने की मुहिम में भी झोल नजर आने लगे हैं। ना जाने क्यों लेकिन पर्यावरण बचाने की हमारी ऐसी मुहिम कारगर...
ये दास्तान एक ऐसी महिला की है जिसे देखकर हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा। ये दास्तान एक ऐसी महिला की भी है जिसने इस देश की महिलाओं को गर्व से सिर ऊंचा कर जीना सिखाया है। ये दास्तान स्वाती महादिक की है। स्वाती, स्वर्गीय कर्नल संतोष...
आपने कई प्रेम कहानियां सुनी होंगी। एक नाजुक सी लड़की, एक दिलदार सा लड़का, दोनों की आंखें लड़ी, इश्क हो गया, शादी हुई, बच्चे हुए फिर मोहब्बत गई चूल्हे में। रुकिए हुजूर, कुछ प्रेम कहानियां बच्चे पैदा होने के बाद और खूबसूरत हो जाती हैं। आज हम आपको ऐसी...
हिमालय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। पता नहीं आपको कब तक हिमालय दिवस की शुभकामनाएं दी जा पाएंगी। आपकी अगली पीढ़ियों के लिए हिमालय की चर्चा से जुड़ने पर कोई शुभकामना या फिर सकारात्मक सोच निकल भी पाएगी इसमें शक है। दरअसल हिमालय इतनी तेजी से बदल रहा है जितनी...
गौरी लंकेश की हत्या के बाद एक शख्स की चर्चा खूब हो रही है। वो हैं निखिल दधीच। निखिल दो वजहों से चर्चा में हैं। एक वजह उनका वो ट्वीट है जो उन्होंने गौरी लंकेश की हत्या के बाद किया। दूसरी वजह है निखिल को ट्वीटर पर प्रधानमंत्री द्वारा...
गौरी लंकेश की हत्या के बाद बोधिसत्व की ये कविता - अपना शुभ लाभ देख कर मैं चुप हूँ गौरी लंकेश एक एक कर मारे जा रहे हैं लोग और मैं चुप हूँ मैं चुप हूँ इसीलिए किसी भी खतरे में नहीं मैं गौरी लंकेश ?   मैं देख नहीं रहा उधर लोग मारे जा रहे हैं जिधर जिधर जहाँ आग लगी है जिधर संताप का सुराज है वह दिशा ओझल है मुझसे ।   सुनों गौरी लंंकेश ।   मैं बोलूँगा तो पद्मश्री नहीं मिलेगा मुझे मैं बोलूँगा तो पुरस्कार नहीं मिलेगा मुझे मैं बोलूँगा तो भारत रत्न नहीं बन पाऊँगा ।   देखो गौरी कितना सुखी हूँ और सुरक्षित हूँ मैं चुप रह कर कितना उज्जवल भविष्य है मेरा हर दिशा से शुभ और लाभ से घिरा हूँ ।   और कितना बोलूँंगा हर दिन होगी हत्या हत्यारे कितने कितने हैं कितने रूप में अनूठे और सर्वव्यापी कण-कण में है उनका प्रभाव उत्तर दक्षिण पूरब पच्छिम मध्य भारत सब में सर्वत्र समान हैं वे विराजमान ।   वे तो हत्यारे हैें उनसे कितना मुकाबला करूँगा कितनों को मारते रहेंगे किन किन का शोक मनाता रहूँगा गौरी ।   और जब हत्यारों को विरोध पसंद नहीं तो कुछ दिन चुप रह जाना क्या बुरा है उनके मन का दो एक नारा लगा देने में क्या चला जाता है मेरा या तुम्हारा गौरी ?   तो अब मान लो कि मेरे पास तक किसी गौरी लंकेश की हत्यारी सूचना नहीं हैै कौन था पनसारे कौन था दाभोलकर कौन था कलबुर्गी मैं किसी के शोक में नहीं ।   गोरखपुर का नाम मैं नहीं जानता मुजफ्फरपुर कहाँ है जापान में या चीन में या बांग्लादेश में यह जानकर भी क्या कर लूँगा गौरी लंकेश कौन थी? क्या थी यह जान कर क्या करूँगा ?   कितनी औरतों को घर में जलाते हैं कितने बच्चों को कितनेे बूढ़ों को किसानों को कब से मारते आ रहे हैं निर्विरोध अविरल अविराम तब भी तो चुप रहता हूँ मैं हे राम ।   ओह सावन भादौं के इन उत्फुल्ल दिनों में यह शोक रुदन का राग लिए मैं क्यों बैठूँ बादल घिर आए हैं तड़ित का मोहक अनुनाद झंकृत कर रहा है कातर हृदय को तन्वंगी कामनाओं के किल्लोल से बाहर क्यों देखूँ ।   देख रहा हूँ रातें बड़ी कोमल और पारदर्शी हो रही हैं आलोकित है विकट अंधकार दिखती है हर दिशा तार तार ।   देख रहा हूँ शामें कितनी बहुरंगी पर सब पर एक रंग का कफन चढ़ा है एक ही रंग का मुकुट मढ़ा है ।   और दिन दुपहरी नहीं झलकती राहें अकाल बेला सा हो जाता है संसार नहीं सुझाता किसी दिशा का वार पार ।   ऐसा युग पहले कभी नहीं आया था जब हाहाकार को मंगलगान सा समाज ने मिलकर गाया था जब शोक को समय ने माथे चढ़ाया था ऐसा युग पहले कभी नहीं आया था ।   ओह प्रज्वलित गौरी मैं इस लुभावने हाहाकार की आरती उतारूँगा मैं हत्यारों को 'भारत' और हत्या को 'यज्ञ' पुकारूँगा मैं हर दिन हर पल महायुद्ध हारूँगा ।   देखो मुझे पद्मश्री पाना है मुझे भारत रत्न होना है मुझे हर हत्या और शोक से परे रहना है मुझे केवल चुप रहना है ।   चुप रहना अब मेरा राष्ट्रीय धर्म है गौरी हत्या करना जैसे अब एक राष्ट्रीय कर्म है । मैं राष्ट्र धर्म निभाऊँगा मैं चुप रह कर हत्यारों की महिमा गुनगुनाऊँगा तभी तो मनचाहा पाऊँगा ।   तुम्हें मरना था तुम मरी मुझे जीना है मान मर्यादा का अमित हलाहल पीना है सुन लो गौरी लंकेश । अब मैं किसी हाल में शुभ और लाभ से ध्यान न हटाऊँगा मैं तो हत्या और हत्यारा गुन गाऊँगा । मैं गौरी लंकेश की तरह क्यों मारा जाऊँ मैं क्यों नहीं सब कुछ भूल कर एक विराट नींद सो जाऊँ ? क्यों नहीं मैं महामरण गान गाऊँ ? क्यों नहीं मैं तम आरोहण कर जाऊँ
गौरी लंकेश नाम है पत्रिका का। 16 पन्नों की यह पत्रिका हर हफ्ते निकलती है। 15 रुपये कीमत होती है। 13 सितंबर का अंक गौरी लंकेश के लिए आख़िरी साबित हुआ। हमने अपने मित्र की मदद से उनके आख़िरी संपादकीय का हिन्दी में अनुवाद किया है ताकि आपको पता...