यूपी में नमक और रोटी के रास्ते रामराज्य आया है, बोलिए जय श्री राम

क्या खूब राम राज आया है। थाली में नमक है, हाथ में रोटी है और रामराज्य के तरानों के बीच मासूम मुल्क की भूख...

ये पूरा मुल्क अब वाइल्ड है, बहुत से मैन हैं, पूरा मुल्क मैन वर्सेज वाइल्ड है

ये पूरा मुल्क वाइल्ड है और हम सब मैन हैं। (हालात, परिस्थितियों को देखते हुए वुमेन भी मैन ही गिन लीजिए) हर रात, दिन...

दोपहर की तपती धूप और नंगे पांव दौड़ता वो शहर, कलकत्ता जेहन में यूं उतरता है

कमल किशोर जोशी। कोलकाता को आधुनिक भारत की सबसे पुरानी नगरी कहा जा सकता है. सड़कों पर आज भी बेखौफ दौड़ती पीले रंग की...

शब्द राग – अमृता प्रीतम की वो कविता ‘मैं फिर मिलूंगी’

अमृता प्रीतम की कविता 'मैं तुम्हे फिर मिलूंगी' को सुनना अच्छा लगता है। इस तरह देखना और सुनना भी सुकून देगा। आप चाहें तो...

हर लड़की में निहित अमृता को जगाना होगा….

सत्यदेव त्रिपाठी। रींवा जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित शहर के निवासी योगेश त्रिपाठी लिखित नाटक ‘मुझे अमृता चाहिए’ को मुम्बई के नये रंगसमूह ‘कारवाँ’ ने...
एक ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चैंपियन ऑफ अर्थ का पुरुस्कार ले रहे थे तकरीबन उसी दौरान स्वामी सानंद गंगा की निर्मलता के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने की तैयारी कर रहे थे। पीएम मोदी के कार्यालय में पड़ी स्वामी सानंद की चिट्ठियों का पता तो सही...
मैं अपनी कहानियों को एक आईना समझता हूँ, जिसमें समाज अपने को देख सके। -और यदि सूरत ही बुरी हो, तो आईने का क्या...? -मैं सोसाइटी के चोले क्या उतारूंगा, जो पहले से ही नंगी है!! -यदि आप मेरी कहानियों को बर्दाश्त नहीं कर सकते, तो यह ज़माना ही नाक़ाबिलेबर्दाश्त है... - .........
 नाम -आसिफ, उम्र-25 बरस, शिक्षा-ग्रेजुएट पिता का नाम-अब्बास, उम्र 55 बरस, पेशा-पत्रकार मां का नाम-लक्ष्मी, उम्र 48 बरस, पेशा-पत्रकारिता की शिक्षिका जो नाम लिखे गये हैं, वे सही नहीं हैं। यानी नाम छिपा लिए गये हैं। क्योंकि जिस घटना को मां-बाप ने ये कहकर छिपाया है और बेटे को समझा रहे हैं...
var aax_size='728x90'; var aax_pubname = 'myagnivaartab-21'; var aax_src='302'; पिछले दिनों बाणभट्ट और उनकी कादम्बरी के रचना-लोक की खोज में लगभग एक सप्ताह ‘मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय’ के दल के साथ विध्याटवी...
नाम है - प्रकाश नामदेव ठाकरे।  महाराष्ट्र के इतने महान संत कवि नामदेव एवं इतने बडे नेता के (बाल) ठाकरे के नामों के साथ जो ख़ुद भी ‘प्रकाश’ हो...पर उसका जीवन इतना मज़बूर कि चलना तो क्या, बैसाखी के सहारे भी देर तक ख़डा न रह सके और बैठ...
punya prasoon vajpayee/ agnivaarta.com
दिल्ली में सीबीआई हेडक्वार्टर के ठीक बगल में है सूचना भवन. सूचना भवन की 10वीं मंज़िल ही देश भर के न्यूज़ चैनलों पर सरकारी निगरानी का ग्राउंड ज़ीरो है. हर दिन 24 घंटे तमाम न्यूज़ चैनलों पर निगरानी रखने के लिए 200 लोगों की टीम लगी रहती है. बीते चार...
चुप रहना हमने कब सीखा? तब जब हमने केंद्र में अपार बहुमत की सरकार बनाई या फिर तब जब हमने यूपी में एक आक्रामक हिंदुत्व की छवि वाले शख्स को सत्ता का ताज पहनते देखा? हमने चुप्पियों को सहूलियतों के ढांचे में उतार लिया, हम तय करते हैं कि किन...
‘फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में पूंजी से ज्यादा महत्व प्रतिभा का होगा. हाई स्किल परंतु अस्थायी वर्क रोज़गार का नया चेहरा होगा. मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन डिजाइन मे मौलिक बदलाव आएगे. डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन और डेटा फ्लोस (प्रवाह) से भौगोलिक दूरियों का महत्व कम हो जाएगा. ई कॉमर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म मार्केट...
पता नहीं ये दुर्भाग्य है या सौभाग्य कि नरेंद्र मोदी बनारस से सांसद हैं और संयोग से प्रधानमंत्री भी हैं। यानी बनारस प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है। अब जब पीएम का संसदीय क्षेत्र है और उस पीएम का जो विकास को अपनी जेब में लिए घूमता है तो ये...
सियासत अपने नफा नुकसान के लिए बड़ी महीन सी लकीरों को खाई में किस तरह बदल देती है ये समझना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कबीर की जयंति के मौके पर कबीर के परिनिर्वाण स्थली मगहर में जाना और काशी में मोक्ष मिलने की अवधारणा को पाखंड बताना...
आज सबसे पहले बात देश के लोकतांत्रिक इतिहास में काले धब्बे की तरह माने जाने वाले आपातकाल की। 25 जून 1975 की वो तारीख जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाने की घोषणा की। देश स्तब्ध था और राजनीतिक दल हैरान। लेकिन इंदिरा तो इंदिरा थीं।...
उत्तराखंड के पहाड़ बदस्तूर जारी पलायन से वीरान होते जा रहे हैं, वहां न रोजी-रोटी का कोई संसाधन है, न शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था, ले-देकर पर्यटन व्यवसाय ही एक आसरा है, जिस तक सीमित लोगों की पहुंच, ऐसे में बाहर गईं यहां की बेटियां मल्टीनेशनल कंपनियों के लाखों...
RAVISH KUMAR. तथ्यों को कैसे तोड़ा-मरोड़ा जाता है, आप प्रधानमंत्री से सीख सकते हैं. मैं इन्हें सरासर झूठ कहता हूं, क्योंकि यह खास तरीके से डिज़ाइन किए जाते हैं और फिर रैलियों में बोला जाता है. गुजरात चुनावों के समय मणिशंकर अय्यर के घर की बैठक वाला बयान भी इसी श्रेणी...
PRIYADARSHAN. मोहम्मद अली जिन्ना की वजह से देश दो हिस्सों में बंट गया. वे भारत विभाजन के गुनहगार हैं. उनकी मदद से अंग्रेजों ने देश बांट दिया. इसलिए आ़ज़ाद भारत में उनकी तस्वीर की कोई जगह नहीं है. यह तर्क इतना सहज और सरल लगता है कि उनकी तस्वीर...
viplav dev
वैधानिक चेतावनी – फालतू समय हो तभी पढ़िए। राजनीति सिर्फ संभावनाओं का नहीं भयंकर संभावनाओं का क्षेत्र है। विडंबना ये कि जो पांचवीं पास न कर पाए वो शिक्षा विभाग की नीतियां बनाएं। और जो बीटेक एमटेक कर पाए वो नारद को गूगल बताए। दिलचस्प है ये राष्ट्रवाद। दरअसल त्रिपुरा के...